मिलर्स एवं व्यापारी का ध्यान यूपी एवं बिहार के गेहूं पर केन्द्रित
17-Mar-2025 01:01 PM
नई दिल्ली। पंजाब तथा हरियाणा में मंडी टैक्स ऊंचा होने तथा मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर अतरिक्त बोनस देने की घोषणा किए जाने के कारण फ्लोर मिलर्स, स्टॉकिस्ट एवं व्यापारियों का ध्यान अब उत्तर प्रदेश तथा बिहार पर केन्द्रित हो गया है।
वे इन दोनों राज्यों में गेहूं की अधिक से अधिक खरीद करने का हर संभव प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा गुजरात तथा महाराष्ट्र में भी गेहूं की खरीद बढ़ाने की कोशिश की जाएगी क्योंकि वहां की परिस्थितियां इसके लिए अनुकूल होती हैं।
हालांकि देश के सबसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य- उत्तर प्रदेश में नई फसल की सरकारी खरीद की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आरंभ हो गई है और राज्य में गेहूं की खरीद के लिए 6500 क्रय केन्द्र स्थापित किए गए हैं लेकिन वहां थोक मंडी भाव सरकारी समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल से ऊंचा चल रहा है।
यदि मिलर्स एवं व्यापारी किसानों को 2500-2600 रुपए प्रति क्विंटल का ऑफर देते हैं तो केन्द्रीय पूल के लिए इसकी खरीद प्रभावित हो सकती है।
अक्सर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ऐसी सूचना जारी की जाती है कि खरीद का सीजन जारी रहने तक गेहूं के स्टॉक को व्यापारी या स्टॉकिस्ट राज्य से बाहर न भेजे। इस बार भी ऐसी सूचना जारी हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में किसानों से खरीदे जाने वाले गेहूं के मूल्य का भुगतान 48 घंटे के अंदर करने का निर्देश दिया गया है और खरीद की प्रक्रिया को सरल तथा पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारियों को कहा गया है।
इसमें कोई संदेह नहीं कि यूपी के गेहूं में मिलर्स एवं व्यापारियों की अच्छी डिमांड रहेगी और इसलिए सरकारी एजेंसियों को किसानों से इसकी भारी खरीद के लिए कठिन मशक्कत करनी पड़ सकती है।
