मालदीव को भेजी गई चीनी के श्रीलंका पहुंचने की जांच शुरू
21-Nov-2024 01:48 PM
नई दिल्ली । विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस बात की जांच-पड़ताल आरंभ कर दी है कि द्विपक्षीय करार के तहत भारत से मालदीव को चीनी की जो खेप भेजी गई थी वह डायवर्ट होकर श्रीलंका कैसे पहुंच गई।
उल्लेखनीय है कि सरकारी स्तर पर हुई द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत सरकार ने मालदीव को निर्यात के लिए कुल 64,494.33 टन चीनी के निर्यात का कोटा आवंटित किया था लेकिन बाद में यह शिकायत सामने आई कि कुछ निर्यातकों द्वारा इस कोटे के कुछ आगा का दुरूपयोग किया गया।
इस शिकायत के बाद डीजीएफटी ने मामले की जांच-पड़ताल आरंभ कर दी और मालदीव के लिए चीनी का निर्यात भी रोक दिया गया है।
जानकार सूत्रों के अनुसार चीनी के कम से कम सात ऐसे पार्सल को इस आशंका के कारण न्हावा शेवा बंदरगाह पर रोक दिया गया है कि उसे किसी अन्य गंतव्य स्थान को डायवर्ट किया जा रहा था जबकि वह मालदीव को निर्यात के लिए स्वीकृत हुआ था।
दूसरी ओर श्रीलंका के कस्टम अधिकारियों द्वारा भारतीय चीनी के लगभग 70 कंटेनरों को रोक कर रखा गया है जिसे कोलम्बो बंदरगाह पर पहुंचाया गया था।
ध्यान देने की बात है कि भारत से चीनी के व्यापारिक निर्यात पर जून 2023 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन द्विपक्षीय करार के तहत सरकारी स्तर पर इसका शिपमेंट हो रहा है।
5 अप्रैल 2024 को विदेश व्यापार महानिदेशालय ने मालदीव के लिए चावल, गेहूं आटा, दाल एवं चीनी सहित कुछ अन्य उत्पादों (आलू-प्याज आदि) का निर्यात कोटा नियत किया था।
इसके बाद 15 अप्रैल 2024 के महानिदेशक ने कहा कि द्विपक्षीय करार के तहत उपरोक्त जिंसों का निर्यात शिपमेंट केवल मूंदड़ा, तूतीकोरिन तथा न्हावा शेवा के समुद्री बंदरगाहों से करने की अनुमति दी जाएगी और तुगलकाबाद स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो से भी इसका निर्यात हो सकेगा।
मालदीव को निर्यात होने वाली चीनी के डायवर्जन की जांच-पड़ताल शुरू होने के बाद इसके शिपमेंट को रोक दिया गया। उधर श्रीलंका के कस्टम अधिकारियों ने भी कोलम्बो बंदरगाह पर पहुंची चीनी की खेपों को क्लीयरेंस देना बंद कर दिया है और उन्होंने श्रीलंका के खरीदारों के खिलाफ अलग से जांच-पड़ताल भी आरंभ कर दिया है।
