मानसून के अटकने से उत्तरी भारत में खरीफ फसलों की बिजाई पर असर

05-Jun-2025 03:09 PM

नई दिल्ली। इस वर्ष देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून की नियत तिथि से आठ दिन पूर्व यानी 24 मई को पहुंच गया था और शुरूआती पांच-छह दिनों तक इसकी तीव्रता तथा गतिशीलता काफी अच्छी रही। इसके फलस्वरूप दक्षिण भारत के सभी राज्यों से लेकर गोवा एवं महाराष्ट्र तक तथा पूर्वोत्तर राज्यों में जमकर बारिश हुई। शुरूआती तेज रफ्तार को देखते हुए लगता था कि इस बार मानसून जून के दूसरे-तीसरे सप्ताह तक समूचे देश में पहुंच जाएगा।

लेकिन जून का महीना शुरू होते ही मानसून में ठहराव आ गया और यह उत्तरी भारत में ज्यादा सक्रिय नहीं हो सका। हालांकि मौसम विभाग ने जून में सामान्य औसत से अधिक बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया है लेकिन मानसून की सक्रियता बढ़ने पर ही यह संभव हो पाएगा। वैसे अच्छी सूचना यह है कि एक पश्चिमी विक्षोभ का आगमन होने वाला है जिसका ट्रफ दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं विदर्भ से होते हुए तटीय आंध्र प्रदेश तक फैलेगा और फिर आंध्र प्रदेश तट से दूर बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक सर्कुलेशन बन सकता है। इससे कुछ राज्यों के इलाकों में बारिश हो सकती है। 

उत्तर प्रदेश तट से दूर बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक सर्कुलेशन बन सकता है। इसे कुछ राज्यों या इलाकों में बारिश हो सकती है। 

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान सहित अन्य निकटवर्ती राज्यों में मानसून की वर्षा का इंतजार किया जा रहा है ताकि किसान खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ा सके। मानसून-पूर्व की अच्छी बारिश के सहारे खेतों की मिटटी में अभी नमी का अंश मौजूद है लेकिन यह धान की रोपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।  

बंगाल की खाड़ी के ऊपर आंध्र प्रदेश तट के पास जो साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने की उम्मीद है उससे पूर्वी भारत, मध्यवर्ती भारत एवं दक्षिणी भारत के कुछ भागों में वर्षा होने की संभावना है। यूरोपीय मौसम पुर्वनुमान केन्द्र ने कहा है कि जून के अंतिम सप्ताह के दौरान समुद्र में हलचल पैदा होगी और तब जुलाई के शुरूआती दो सप्ताहों में भारत के विभिन्न भागों में मूसलाधार बारिश हो सकती है। जून में बारिश की स्थिति कुछ हद तक अनिश्चित सी हो गई है।