मानसून के बाद बारिश कम होने से जलाशयों में पानी का स्तर घटा
22-Nov-2024 01:50 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि चालू सप्ताह के दौरान देश के 155 प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी का भंडार 2 प्रतिशत बिंदु की गिरावट के साथ कुल भंडारण क्षमता का 83 प्रतिशत रह गया लेकिन फिर भी यह पिछले साल के साथ-साथ 10 वर्षीय औसत स्तर से ज्यादा है।
दरअसल दक्षिण-पश्चिम मानसून का सीजन खत्म होने के बावजूद बारिश का अभाव होने तथा तापमान ऊंचा रहने से पानी का स्तर नीचे गिर रहा है। रबी फसलों की बिजाई में सहायता के लिए इन बांधों-जलाशयों से नहरों में पानी छोड़ा जाने लगा है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत से करीब 8 प्रतिशत अधिक बारिश हुई लेकिन सीजन समाप्त होने के बाद 1 अक्टूबर से 21 नवम्बर 2024 के बीच देश के 720 जिलों में से 64 प्रतिशत जिलों में वर्षा का अभाव देखा गया।
मौसम विभाग के अनुसार 21 नवम्बर तक राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य स्तर से 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई। देश के पश्चिमोत्तर भाग में बारिश में 75 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जिससे कुल राष्ट्रीय वर्षा का स्तर काफी नीचे आ गया।
इस अवधि के दौरान केवल पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भाग में सामान्य से अधिक बारिश हुई जबकि मध्यवर्ती क्षेत्र में 18 प्रतिशत कम वर्षा हुई। हालांकि दक्षिणी भारत में तमिलनाडु तथा आंध्र प्रदेश में भारी वर्षा होती रही लेकिन फिर भी कुल क्षेत्रीय बारिश 2 प्रतिशत कम रही।
आयोग की साप्ताहिक बुलेटिन के अनुसार प्रमुख बांधों-जलाशयों में 150.639 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक बचा हुआ है जबकि इसकी कुल भंडारण क्षमता 180.852 बीसीएमबी है।
पानी का भंडार कुल भंडारण क्षमता के सापेक्ष पंजाब में 52 प्रतिशत, बिहार में 36 प्रतिशत तथा हिमाचल प्रदेश में केवल 30 प्रतिशत रह गया है।
इससे राजस्थान में भी रबी फसलों के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। अन्य राज्यों में पानी का भंडार अपेक्षाकृत बेहतर है और खेतों की मिटटी में नमी का अंश भी सामान्य है।
