मानसून की मजबूत स्थिति के बावजूद देश के एक-तिहाई जिलों में वर्षा का अभाव
10-Jul-2025 03:27 PM
नई दिल्ली। हालांकि चालू वर्ष के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में अपने नियत समय से करीब एक सप्ताह पहले आ गया और जून के अंत तक औपचारिक तौर पर समूचे देश में पहुंच भी गया मगर वर्षा का वितरण समान नहीं होने से एक-तिहाई जिले में बारिश का अभाव बना हुआ है।
मौसम विभाग के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि इस वर्ष 8 जुलाई तक राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई और अधिकांश इलाकों में हालत अच्छी रही लेकिन देश के 33.5 प्रतिशत जिलों में बारिश कम या बहुत होने से किसानों को खरीफ फसलों की खेती करने में कठिनाई हो रही है।
वैसे अखिल भारतीय स्तर पर खरीफ फसलों की बिजाई की स्थिति अच्छी बनी हुई है और पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष इसके रकबे में 4 जुलाई तक 11 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी थी।
वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों पर गहरी नजर रखी जा रही है क्योंकि वहां कृषि कार्यों पर खतरा बना हुआ है। समझा जाता है कि चालू माह के दौरान वहां अच्छी बारिश होने पर बिजाई की गति तेज हो सकती है।
वर्षा की भारी कमी से जूझ रहे राज्यों में बिहार, आसाम, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु एवं तेलंगाना मुख्य रूप से शामिल है। 9 जुलाई एक बिहार के 87 प्रतिशत जिलों में वर्षा का अभाव रहा जबकि आसाम के 60 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश के करीब 54 प्रतिशत,
तमिलनाडु के 52.6 प्रतिशत और तेलंगाना के 51.5 प्रतिशत जिलों में सामान्य औसत से कम या बहुत कम बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा महाराष्ट्र एवं कर्नाटक सहित कुछ राज्यों के कई भागों में भी बारिश की भारी जरूरत महसूस की जा रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बिहार के 33 जिलों, आसाम के 21, आंध्र प्रदेश के 14, तमिलनाडु के 20, तेलंगाना के 17, कर्नाटक के 12 एवं उत्तर प्रदेश के 28 जिलों में वर्षा का अभाव है।
देश के कुल 738 जिलों में से 247 जिलों में बारिश की कमी बनी हुई है जो गंभीर चिंता का विषय है। कर्नाटक का 39 प्रतिशत जिला वर्षा की कमी से जूझ रहा है।
जुलाई-अगस्त के दौरान देश में सर्वाधिक वर्षा होती है इसलिए अभी उम्मीद खत्म नहीं हुई है। देश के कुछ भागों में अत्यन्त मूसलाधार वर्षा होने से बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है तो कई अन्य इलाकों में खेत सूखे पड़े है और वहां फसलों की बिजाई प्रभावित हो रही है।
