मानसून के निष्क्रिय होने से जलाशयों में पानी का स्तर कुछ घटा
13-Jun-2025 11:46 AM
नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान देश के 161 प्रमुख बांधों- जलाशयों में पानी का भंडार थोड़ा घट गया जबकि पिछले दो सप्ताहों से इसमें बढ़ोत्तरी हो रही थी। दरअसल दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार 10 वर्षों तक लगभग निष्क्रिय बना रहा और देश के अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी के साथ तापमान अत्यन्त ऊंचे स्तर पर चल रहा है। इससे जल स्तर में स्वाभाविक रूप से कुछ कमी आ गई।
केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि इन 161 प्रमुख बांधों- जलाशयों में पानी के कुल भंडारण क्षमता 182.444 बिलियन क्यूबिक मीटर्स (बीसीएम) की है जबकि उसमें 55.519 बीसीएम या 30.43 प्रतिशत पानी का स्टॉक उपलब्ध है। इसके बावजूद यह जलस्तर पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 40 प्रतिशत और 10 वर्षीय औसत के मुकाबले 30 प्रतिशत ऊंचा है।
उधर भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि 1 से 11 जून के बीच देश के 728 जिलों में से 72 प्रतिशत जिलों में वर्षा नहीं या नगण्य हुई। हालांकि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी नियत तिथि से आठ-दस दिन पहले ही आ गया था और मई माह के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत से अधिक बारिश हुई थी लेकिन उसके बाद मानसून पूरी तरह निष्क्रिय हो गया जिससे बारिश लगभग बंद हो गई।
पिछले सप्ताह देश के पूर्वी एवं दक्षिणी भाग के बांधों- जलाशयों में पानी के भंडार में कुछ बढ़ोत्तरी हुई थी लेकिन अन्य तीन संभागों में जल स्तर घट गया। अब ठहराव के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर सक्रिय होने लगा है इसलिए अगले सप्ताह से बांधों-सरोवरों में जल-स्तर बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। मानसून का सक्रिय होना कृषि क्षेत्र के लिए अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति मानसूनी वर्षा पर ही काफी हद तक आश्रित है। इसके अलावा बांधों- जलाशयों में पानी का स्तर ऊंचा उठाने के लिए भी वर्षा का होना जरुरी है। देश में करीब 70 प्रतिशत सालाना वर्षा इसी मानसून सीजन के दौरान होती है और जुलाई-अगस्त को सर्वाधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है। खरीफ फसलों की सबसे ज्यादा खेती भी इन्हीं दो महीनों में होती है।
