मानसून सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत से 8 प्रतिशत अधिक वर्षा
01-Oct-2025 05:53 PM
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि चालू वर्ष के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून काफी हद तक सकल रहा और राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालीन औसत (एलपीए) के सापेक्ष 108 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।
इसका दूसरा पक्ष कमजोर रहा क्योंकि इसके बादल फटने भूस्खलन होने तथा कीचड़ भरने जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी देखी गई। इसके अलावा कई इलाकों में अत्यन्त मूसलाधार वर्षा होने तथा नदियों में उफान आने से न केवल जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया बल्कि खरीफ फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा।
मौसम विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 1 जून से 30 दिसम्बर 2025 के दौरान देशभर में मानसून की कुल 937.2 मि०मी० वर्षा हुई जो सामान्य औसत 868.6 मि०मी० से 9 प्रतिशत ज्यादा है।
इसके तहत देश के पश्चिमोत्तर भाग में 747.9 मि०मी० वर्षा दर्ज की गई जो सामान्य औसत से 27.3 प्रतिशत ज्यादा और वर्ष 2001 के बाद सबसे अधिक है।
इसी तरह देश के मध्यवर्ती भाग में 1125.3 मि०मी० बारिश हुई जो सामान्य औसत से 15.1 प्रतिशत ज्यादा है। दक्षिणी प्रायद्वीप में भी दीर्घकालीन औसत के मुकाबले 9.9 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई लेकिन पूर्वी एवं पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य औसत से 20 प्रतिशत कम यानी 1089.9 मि०मी० वर्षा दर्ज की गई।
हालांकि जून से दिसम्बर के चार महीनों की अवधि में सक्रिय रहने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून की समय सीमा समाप्त हो चुकी है और मानसून ने 14 सितम्बर से ही वापस लौटना शुरू कर दिया था लेकिन वापस यात्रा के दौरान भी यह अनेक राज्यों में सक्रिय है।
इसमें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा एवं दिल्ली आदि शामिल है। दक्षिण भारत में भी वर्षा का दौर जारी है। अभी यह कहना मुश्किल है कि दक्षिण पश्चिम मानसून कब तक देश से पूरी तरह प्रस्थान करेगा और उत्तर-पूर्व मानसून का आगमन कब से आरंभ होगा जिसके आने की परम्परागत तिथि 1 अक्टूबर है।
