मानसून सीजन में अलनीनो को सक्रियता बढ़ने की आशंका

02-Jan-2026 11:51 AM

तिरसनंतपुरम। मौजूदा समय में हिन्द महासागर का डायपोल न्यूट्रल होने और ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में तापमान ठंडा रहने से ला नीना मौसम चक्र की सक्रियता बनी हुई है मगर यह सक्रियता फरवरी तक समाप्त हो जाने की संभावना है उसके बाद अलनीनो मौसम चक्र का उदय एवं आगमन होने की संभावना है जिससे मानसून की वर्षा पर असर पड़ सकता है हालांकि भारतीय मौसम विज्ञानं विभाग (आईएमडी) का कहना है कि अभी कोई निश्चित भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी लेकिन प्राप्त संकेतो से प्रतीत होता है कि जनवरी-मार्च की तिमाही के दौरान देश के पश्चिमोत्तर भाग में सामान्य स्तर से कम बारिश हो सकती है। 

मौसम विभाग के अनुसार यद्यपि वैश्विक स्तर पर इसकी आम सहमति देखी जा रही है कि जुलाई-अगस्त-सितंबर के दौरान अलनीनो मौसम चक्र का आगमन हो सकता है लेकिन अभी किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना कठिन है। देश के पश्चिमोत्तर भाग में अगले तीन महीनो तक बारिश कम हो सकती है लेकिन वहां सिंचाई की अच्छी सुविधा होने के कारण रबी फसलों के लिए कठिनाई नहीं होगी। 

अलनीनो मौसम चक्र को आमतौर पर दक्षिण पश्चिम मानसून का प्रतिरोधी माना जाता है। इसकी सक्रियता बढ़ने पर मानसून सीजन में वर्षा या तो बुरी तरह प्रभावित या बेहतरीन होने की आशंका रहती है ध्यान देने की बात है कि इसी मानसून सीजन के दौरान देश में खरीफ फसलों की खेती एवं प्रगति होती है। इसमें धान, अरहर, उड़द, मूंग, ज्वार, बाजरा, मक्का, मलका, सोयाबीन एवं कपास आदि फसले शामिल है। मौसम विभाग के महानिदेशक के अनुसार एक-दो माह तक ला नीना मौसम चक्र सक्रिय रह सकता है और मार्च में ई एन एस ओ के उदासीन हो जाने की संभावना है। अप्रैल-जून की तिमाही में न्यूट्रल स्थिति बरकरार रह सकती है लेकिन जुलाई सितंबर 2026 की तिमाही में अलनीनो का प्रकोप आरम्भ हो सकता है।