मानसून : वरदान या अभिशाप

06-Sep-2025 11:12 AM

दक्षिण- पश्चिम मानसून इस वर्ष भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए दोहरी भूमिका निभा रहा है। एक तरफ जल्दी आगमन होने और शुरुआती चरण में अच्छी बारिश होने से न केवल किसानों को खरीफ फसलों की अगैती बिजाई करने तथा विभिन्न फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने में सहायता मिली बल्कि फसलों की प्रगति भी बेहतर ढंग से हुई मगर दूसरी ओर देश के अनेक इलाकों में खासकर अगस्त माह के दौरान जरूरत से बहुत ज्यादा वर्षा होने से खरीफ फसलों के साथ-साथ जान माल को भी भारी नुकसान पहुंचा और अब भी पहुंच रहा है।

विभिन्न क्षेत्रों में नियमित रूप से होने वाली वर्षा से विशाल भू भाग में खेत जल मग्न हो गए और नदियों में बाढ़ आने से फसलें क्षतिग्रस्त हो गई। फसलों को वास्तविक रूप से कितना नुकसान हुआ है इसका आंकलन किया जा रहा है

और मध्य सितम्बर के बाद इसकी तस्वीर सामने आ सकती है। मौसम विभाग पहले ही कह चुका है कि इस वर्ष देश में सामान्य औसत से ज्यादा (अधिशेष) बारिश होगी।

राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा का वितरण कुछ हद तक असमान अवश्य रहा लेकिन कुल मिलाकर देश के विभिन्न भागों में भारी बारिश हुई है। जहां वर्षा की स्थिति सामान्य है वहां मानसून खरीफ फसलों के लिए वरदान साबित हो रहा है और इसके उत्पादन में शानदार बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है लेकिन जिन क्षेत्रों में भयंकर बाढ़ एवं जल भराव का गंभीर संकट है वहां मानसून को खलनायक (विलेन) माना जा रहा है क्योंकि वहां फसलें काफी हद तक या तो बर्बाद हो गई है या इसके कगार पर पहुंच गई है। 

एक खास बात यह है कि अब मानसून की वापसी के पैटर्न में बदलाव हो गया है। जून से सितम्बर तक के चार माह में सक्रिय  रहने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी पहले राजस्थान से सितम्बर के पहले सप्ताह में आरंभ हो जाती थी मगर अब इसके प्रस्थान की आधिकारिक तिथि 17 सितम्बर नियत कर दी गई है।

इस तिथि तक भी मानसून की विदाई यात्रा शुरू होने की कोई निश्चित गारंटी नहीं है। यदि मध्य सितम्बर के बाद भी बारिश का दौर जारी रहा तो खरीफ फसलों के नुकसान का दायरा और भी बढ़ सकता है।

अनेक क्षेत्रों में अगैती बिजाई वाली खरीफ फसलों और खासकर मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं कपास आदि की कटाई-तैयारी मध्य सितम्बर के बाद शुरू हो जाती है। इन फसलों को वर्षा से नुकसान हो सकता है

और विशेष कर इसकी क्वालिटी प्रभावित हो सकती है। बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के कारण खरीफ फसलों का उत्पादन काफी बढ़ने की उम्मीद की जाती थी लेकिन अधिशेष वर्षा के साथ मानसून उस उम्मीद पर पानी फेर सकता है। मानसून की बारिश कुछ क्षेत्रों में अभी जारी है।