मराठवाड़ा संभाग में बारिश की भारी कमी से खरीफ फसलों की बिजाई में कठिनाई
07-Jul-2025 05:10 PM
औरंगाबाद। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा संभाग में सामान्य मौसम के मुकाबले वर्षा की कमी बढ़कर 25 प्रतिशत पर पहुंच गई है जिससे किसानों को विभिन्न खरीफ फसलों की बिजाई करने में भारी कठिनाई हो रही है।
किसान मानसून के पुनः सक्रिय होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पिछले दिन इस पूरे संभाग में औसतन 3 मि०मी० वर्षा हुई जो चिंता का विषय है। अधिकांश आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 6 जुलाई तक इस संभाग में 127 मि०मी० बारिश दर्ज की गई जो सामान्य औसत से 25 प्रतिशत कम रही।
उल्लेखनीय है कि मराठवाड़ा संभाग में खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन, कपास और अरहर (तुवर) की खेती बड़े पैमाने पर होती है जबकि कई अन्य फसलों की भी बिजाई की जाती है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस संभाग के छत्रपति संभाजी नगर डिवीजन में खरीफ फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर तथा लातूर डिवीजन में 28.30 लाख हेक्टेयर रहता है।
बारिश की भारी कमी से मराठवाड़ा संभाग के कई जिलों में खरीफ फसलों की बिजाई की गति काफी धीमी चल रही है और किसान ज्यादा जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं।
इसके बजाए वे अच्छी वर्षा होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि आगे चलकर फसलों को नुकसान की आशंका न रहे। जिन क्षेत्रों में बिजाई पहले हो चुकी है वहां भी बारिश की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कई इलाकों में किसानों को फसलों की दोबारा बिजाई करने के लिए विवश होना पड़ सकता है क्योंकि वहां या तो बीज के अंकुरण कम हुआ या वर्षा के अभाव में नवजात पौधे सूखने लगे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मौसम की वर्तमान हालत को देखते हुए बोई गई फसलों का जीवित रहना मुश्किल लगता है। अनेक किसान पहले से ही फसल के क्षतिग्रस्त होने की शिकायत कर रहे हैं। मानसून इस संभाग में आंख मिचौनी खेल रहा है।
यदि शीघ्र ही भारी वर्षा नहीं हुई तो मराठवाड़ा संभाग के किसानों को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने कहा है कि निकट भविष्य में इस संभाग में जोरदार बारिश होने की संभावना बहुत कम है।
लेकिन कहीं-कहीं हल्की या सामान्य वर्षा हो सकती है। वहां कई क्षेत्रों में पीला अलर्ट जारी किया गया है जो गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने का संकेत है।
