मौसम अनुकूल होने पर ही दलहनों का उत्पादन बेहतर होना संभव
28-Aug-2024 05:42 PM
नई दिल्ली । हालांकि उम्मीद के अनुरूप इस बार तुवर एवं मूंग के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है अगर उड़द एवं मोठ का रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है। प्रमुख दलहन उत्पादक प्रांतों में मानसून की भारी वर्षा हुई है और आगे भी होने की संभावना है। इससे कुछ क्षेत्रों में फसल को फायदा तथा कुछ अन्य इलाकों में नुकसान हो सकता है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र में तुवर, मध्य प्रदेश में उड़द तथा राजस्थान में मूंग-मोठ का सर्वाधिक उत्पादन होता है। गुजरात भी दलहनों का एक महत्वपूर्ण उत्पादक राज्य है। इन सभी राज्यों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू खरीफ सीजन में दलहन फसलों का सकल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 122.15 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 115.55 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।
गत वर्ष की तुलना में वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान अरहर (तुवर) के उत्पादन क्षेत्र 40.75 लाख हेक्टेयर से उछलकर 45.80 लाख हेक्टेयर तथा मूंग का बिजाई क्षेत्र 30.55 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 34.05 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया
लेकिन दूसरी ओर उड़द का क्षेत्रफल 30.80 लाख हेक्टेयर से घटकर 29.05 लाख हेक्टेयर तथा मोठ का रकबा 9.37 लाख हेक्टेयर से गिरकर 9.12 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। कुलथी की बिजाई गत वर्ष के लगभग बराबर हुई है। अन्य दलहनों का क्षेत्रफल 3.80 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 3.91 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार अगले कुछ सप्ताहों का मौसम दलहनों और खासकर उड़द तथा मूंग-मोठ की फसल के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
इसकी अगैती बिजाई वाली फसल में फूल और दाने लगा रहे हैं जबकि अगले महीने से उसकी छिटपुट कटाई-तैयारी आरंभ हो सकती है।
यदि इस बीच मौसम एवं वर्षा की हालत अनुकूल बनी रही तभी इसके बेहतर उत्पादन की उम्मीद की जा सकती है।
