मौसम का बदलता मिजाज
11-Apr-2026 10:58 AM
पिछले महीने से मौसम की हालत में बदलाव देखा जा रहा है जो रबी फसलों के लिए शुभ नहीं है। एक के बाद एक आने वाले पश्चिमी विक्षोभ तथा ऊपरी वायु के तूफानी परिसंचरण (साईक्लोनिक सर्कुलेशन) की वजह से देश के विभिन्न राज्यों में मौसमी परिस्थितियां बदल रही है। आमतौर पर मार्च-अप्रैल के दौरान भारत में गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है
लेकिन इस बार न केवल तापमान कुछ नीचे रहा बल्कि सीमित अंतराल पर आंधी-तूफान के साथ वर्षा भी होती रही। कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई। रबी फसलों की कटाई-तैयारी के समय इस तरह मौसम में होने वाला परिवर्तन हानिकारक होता है। इस समय साफ मौसम की आवश्यकता है ताकि पकी हुई फसलों की कटाई की गति तेज हो सके।
इसके विपरीत बारिश या बौछार का माहौल बना हुआ है। हालांकि सरसों, चना एवं मसूर-मटर सहित अन्य अधिकांश रबी फसलों की कटाई-तैयारी काफी हद तक पूरी हो चुकी है लेकिन मुख्य खाद्यान्न- गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है। समस्या यह है कि उन्हीं प्रांतों में आंधी-वर्षा एवं ओलावृष्टि का प्रकोप ज्यादा देखा जा रहा है जहां गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन होता है।
एक और कठिनाई यह है कि प्रतिकूल मौसम का प्रकोप अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हालांकि मौसम विभाग ने उड़ीसा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक एवं बंगाल सहित कुछ राज्यों में तापमान बढ़ने का अनुमान लगाया है लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में सामान्य या भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की है।
बिहार तथा आसाम के पूर्वोत्तर भाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन मौजूद है। तथा आसाम के पूर्वोत्तर भाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन मौजूद है। इधर उत्तरी, मध्यवर्ती एवं पश्चिमोत्तर प्रांतों में बेमौसमी वर्षा का खतरा बना हुआ है और तापमान भी सामान्य स्तर के करीब ही है।
