मसूर के उत्पादन एवं निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा है कजाकिस्तान

14-Aug-2025 02:02 PM

दुबई। हालांकि कनाडा दुनिया में मसूर का सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश बना हुआ जहां वर्ष 2024 में इसका उत्पादन 24 लाख टन से भी ऊपर पहुंच गया

और इसके सहारे वैश्विक बाजार में उसकी भागीदारी बढ़कर एक-तिहाई से ऊपर पहुंच गई लेकिन अब उसे कुछ खास बाजारों में कुछ अन्य देशों की कठिन चुनौती या सख्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

इसमें कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ रूस और अमरीका भी शामिल हैं। तुर्की कनाडाई मसूर का परम्परागत महत्वपूर्ण आयातक देश है मगर अब वहां कजाकिस्तान अपनी पहुंच तेजी से बढ़ा रहा है।

इधर ऑस्ट्रेलिया का ध्यान दक्षिण एशिया के बाजारों पर केन्द्रित है जिसमें भारत, श्रीलंका, बांग्ला देश एवं पाकिस्तान आदि शामिल हैं। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में सूखे की वजह से मसूर का उत्पादन प्रभावित हुआ था मगर इस वर्ष फसल की हालत अच्छी बनी हुई है। 

जहां तक भारत का सवाल है तो यहां मसूर का अच्छा उत्पादन होता है मगर वह घरेलू मांग एवं जरूरत से काफी पीछे रह जाता है। इसके फलस्वरूप प्रत्येक वर्ष विदेशों से इसके भारी आयात की जरूरत पड़ती है।

भारत मसूर का सबसे प्रमुख आयातक देश माना जाता है। भारत में पहले कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से मसूर का भारी आयात होता था जो अब भी जारी है लेकिन इस बीच कजाकिस्तान से भी आयात बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

वस्तुतः भारत में मसूर का उत्पादन एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर हो गया है जबकि इसकी घरेलू मांग एवं खपत तेजी से बढ़ती जा रही है। तुर्की, रूस तथा अमरीका में भी मसूर का अच्छा उत्पादन होता है जबकि वहां घरेलू खपत अपेक्षाकृत बहुत कम होती है। 

कजाकिस्तान के मसूर निर्यातकों को मध्य एशिया, मध्य-पूर्व तथा यूरोप से निकटता का फायदा मिलता है और वहां से इसके निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे उत्पादकों को मसूर का उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिल रहा है।

उसके उत्पाद का दाम प्रतिस्पर्धी स्तर पर रहा है और वहां मसूर की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लेकिन उसे कुछ चुनौतियां एवं समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।

अक्सर वहां मौसम परिवर्तनशील हो जाता है और मसूर की कीमतों में उतार-चढ़ाव का माहौल भी बना रहता है। कभी-कभार बारिश की वजह से उत्पादन में गिरावट आ जाती है।

ऑस्ट्रेलिया अथवा कनाडा के विपरीत कजाकिस्तान की पहुंच समुद्र तक नहीं है क्योंकि वह चारों दिशाओं में विभिन्न देशों से घिरा हुआ है इसलिए परिवहन की समस्या से उसे जूझना पड़ता है।