मसूर पर लगे 10 प्रतिशत के आयात शुल्क को स्थगित करने का आग्रह

15-Mar-2025 04:03 PM

चेन्नई। तमिलनाडु पल्सेस इम्पोर्टर्स एवं एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने केन्द्र सरकार से मसूर के आयात पर लगाए गए 10 प्रतिशत के सीमा शुल्क को स्थगित करने तथा हरी मसूर एवं लाल मसूर को अलग-अलग एचएस कोड के तहत वर्गीकृत करने का अनुरोध किया है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री को भेज एक पत्र में एसोसिएशन ने कहा है कि सरकार ने 21 दिसम्बर 2023 को जारी अपनी एक अधिसूचना में मसूर के आयात को 31 मार्च 2025 तक शुल्क मुक्त रखने की घोषणा की थी

मगर अचानक ही 7 मार्च 2025 को एक सर्कुलर जारी करके इस पर 10 प्रतिशत का मौलिक आयात शुल्क लगा दिया और इसे 8 मार्च से प्रभावी भी बना दिया।

इससे आयातकों को भारी परेशानी हो जाएगी। मसूर को आयात पर सीमा शुल्क को कम से कम 31 मार्च 2025 तक स्थगित रखा जाना चाहिए। अमरीका और कनाडा से इसका आयात प्रभावित होने  की आशंका है। 

एसोसिएशन ने इसके साथ-साथ अपने पत्र में हरी मसूर एवं लाल मसूर को आयात के अलग-अलग एचएस कोड में वर्गीकृत करने का आग्रह भी किया है क्योंकि दोनों में काफी भिन्नता है।

एसोसिएशन के अनुसार जिस तरह सभी दलहनें समान नहीं होते हैं उसी तरह सभी किस्मों के मसूर भी एक जैसी नहीं होती है। वे स्वाद, रंग, कीमत तथा खपत के पैटर्न की दृष्टि से अलग-अलग होती है।

फिलहाल सभी तरह की मसूर के लिए एक ही एचएस कोड 07134000 है जबकि लाल मसूर तथा हरी मसूर के लिए अलग-अलग कोड नियत होना चाहिए।  

सरकार तुवर के आयात को पहले ही 31 मार्च 2026 तक के लिए शुल्क मुक्त कर चुकी है। उड़द का आयात भी शुल्क मुक्त रहेगा। पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 मई 2025 तक बढ़ा दिया गया है।

भारत में लाल मसूर का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है इसलिए एसोसिएशन का कहना है कि इस पर आयात शुल्क लगाया जा सकता है लेकिन हरी मसूर का आयात शुल्क मुक्त रखा जाना चाहिए क्योंकि इसका घरेलू उत्पादन बहुत कम होता है।