मोटे अनाजों के क्षेत्रफल में मक्का की वजह से भारी वृद्धि

30-Sep-2025 06:01 PM

नई दिल्ली। मक्का की खेती में इस बार भारतीय किसानों का जबरदस्त उत्साह एवं आकर्षण देखने को मिला है जिससे इसके क्षेत्रफल में पिछले साल के मुकाबले 10.65 लाख हेक्टेयर का भारी इजाफा हो गया।

अन्य खरीफ कालीन मोटे अनाजों के बिजाई क्षेत्र में सामान्य उतार-चढ़ाव रहा मगर मक्का की वजह से कुल उत्पादन क्षेत्र में 12 लाख हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हो गई।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान 26 सितम्बर 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर मोटे अनाजों का उत्पादन क्षेत्र 182.66 लाख हेक्टेयर से उछलकर 194.67 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

इसके तहत ज्वार का रकबा 14.15 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 14.07 लाख हेक्टेयर तथा बाजरा का बिजाई क्षेत्र 68.65 लाख हेक्टेयर से गिरकर 68.44 लाख हेक्टेयर पर अटक गया

लेकिन दूसरी ओर रागी का रकबा 11,00 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 11.81 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 84.30 लाख हेक्टेयर से उछलकर 94.95 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इसके अलावा स्मॉल मिलेट्स का रकबा भी 4.56 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 5.39 लाख हेक्टेयर हो गया। 

समझा जाता है कि मक्का की वजह से इस बार सोयाबीन, कपास एवं मूंगफली के उत्पादन क्षेत्र में काफी गिरावट आ गई। लगभग सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस बार मक्का के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी हुई जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है।

मोटे अनाजों की फसल को कहीं-कहीं के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी हुई जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है। मोटे अनाजों की फसल को कहीं-कहीं अधिशेष वर्षा एवं बाढ़ से नुकसान होने की आशंका है मगर आमतौर पर फसल की हालत सामान्य या संतोषजनक बताई जा रही है।

खासकर मक्का की फसल अच्छी हालत में है और इसके उत्पादन में काफी बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं। इससे एथनॉल निर्माण उद्योग को ज्यादा मात्रा में कच्चा माल (मक्का) प्राप्त होने की उम्मीद है।

जहां तक ज्वार-बाजरा का सवाल है तो इसके उत्पादन में ज्यादा घट-बढ़ होने की संभावना नहीं है लेकिन रागी का उत्पादन कुछ बेहतर हो सकता है। स्मॉल मिलेट्स का उत्पादन संतोषजनक रह सकता है। मोटे अनाजों के नए माल की आपूर्ति जल्दी ही जोर पकड़ने का अनुमान है।