मध्य प्रदेश में एथनॉल निर्माण के लिए चावल के डायवर्जन पर स्पष्टीकरण

14-Jul-2026 03:49 PM

नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने एक प्रेस नोट जारी करके मध्य प्रदेश में एथनॉल निर्माण के लिए आपूरित चावल के तथा कथित डायवर्जन से सम्बन्धित मिडिया में छपी रिपोर्ट पर अपना स्प्ष्टीकरण दिया है। प्रेस नोट में कहा गया है कि कुछ खास मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में मध्य प्रदेश में एथनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध करवाए गए खाद्य निगम के चावल का बड़े पैमाने पर डायवर्जन (अन्य उद्देश्य में उपयोग) होने का आरोप लगाया है।

आरोप लगाया गया है कि लगभग 1160 करोड़ रुपए मूल्य के तकरीबन 5 लाख टन सरकारी चावल को डायवर्ट किया गया अथवा  उसका दुरूपयोग हुआ। लेकिन यह रिपोर्ट न केवल पूरी तरह असत्य है बल्कि आधारहीन भी है। उसकी कोई सत्यता एवं प्रामाणिकता नहीं है।

खाद्य निगम के अनुसार 2024-25 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान मध्य प्रदेश राज्य में एथनॉल निर्माण  के लिए डिस्टीलरीज को 22.50 रुपए प्रति किलो की दर से 2.98 लाख टन चावल का स्टॉक जारी किया गया जबकि 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में 30 जून 2026 तक 23.20 रुपए प्रति किलो के मूल्य स्तर पर 2.41 लाख टन चावल का कोटा मंजूर किया गया।

इस तरह डिस्टीलरीज को 2024-25 से अब तक कुल मिलाकर 5.39 लाख टन चावल जारी हुआ है। मीडिया रिपोर्ट में 5 लाख टन चावल का जो 1160 करोड़ रुपए का मूल्य आंका गया है वह 23.20 रुपए प्रति किलो के रेट पर आंकलित हुआ है लेकिन वास्तव में डिस्टीलरीज द्वारा खाद्य निगम को इतनी राशि का भुगतान ही नहीं किया गया। 

वर्तमान समय में जो जांच-पड़ताल हो रही है वह एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत आपूरित चावल की सम्पूर्ण मात्रा से सम्बन्धित नहीं है यह तथा कथित उस 490 बोरी (242.50 क्विंटल) चावल के डायवर्जन के बारे में हो रही है जिसकी कीमत करीब 5.63 लाख रूपए आंकी गई है इसलिए मीडिया रिपोर्ट में डिस्टीलरीज को आपूर्ति किए गए चावल की सम्पूर्ण मात्रा के बारे में जो बातें कहीं गई हैं वह भ्रामक हैं। 1160 करोड़ रुपए की राशि खाद्य निगम के चावल की पूरी आपूर्ति मात्रा की कीमत के समतुल्य है।