ऊंझा के जीरा एवं सौंफ को मिला जीआई टैग
14-Jul-2026 07:49 PM
राजकोट। उत्तरी गुजरात में अवस्थित ऊंझा में उत्पादित जीरा तथा सौंफ को जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री द्वारा भोगोलिक संकेतक का दर्जा (जीआईटैग) प्रदान किया गया है। उल्लेखनीय है कि ऊंझा भारत में मसालों के सबसे प्रमुख व्यापारिक केन्द्रों में से एक है जहां जीरा एवं सौंफ के साथ साथ मैथी का कारोबार भी बड़े पैमाने पर होता है। गुजरात में इन मसालों के अलावा धनिया का भी भारी उत्पादन होता है।
जीआईटैग प्राप्त होने से ऊंझा के प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों को जीरा एवं सौंफ की ब्रांडिंग का विकास-विस्तार करने, निर्यात का दायरा बढ़ाने तथा उत्पादकों को बेहतर वापसी हासिल करने में सहायता मिलेगी।
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि जीरा और सौंफ के लिए जीआईटैग हासिल करने हेतु अनेक संस्थाओं एवं एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से गंभीर प्रयास किए गए। इसमें ऊंझा स्थित कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी), गुजरात सरकार का बागवानी एवं किसान कल्याण विभाग, सरदार कृषि नगर दांतेवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय और भारतीय उद्यमी विकास संस्थान आदि शामिल हैं।
जीआईटैग मिलने के साथ ही इन दोनों मसालों (जीरा एवं सौंफ) को उत्तरी गुजरात के ऊंझा क्षेत्र के खास उत्पाद की मान्यता प्राप्त हो गई है। ऊंझा जीरा का विश्व प्रसिद्ध उत्पादक एवं व्यापारिक केन्द्र है जहां सौंफ का उत्पादन और कारोबार ही सबसे ज्यादा होता है।
जीआईटैग का प्रमाण पत्र मिलने से वहां जीरा एवं सौंफ को कानूनी सुरक्षा प्राप्त हो गई है। कोई अन्य देश अब उत्पाद की भौगोलिक पहचान का दुरूपयोग नहीं कर सकेगा और न ही इस नाम या ब्रांड से अपने मसालों का कारोबार करने में सफल हो सकेगा। भारत दुनिया में इन दोनों महत्वपूर्ण मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, खपतकर्ता एवं निर्यातक देश बना हुआ है।
