नौ राज्यों में 13.22 लाख टन तुवर की खरीद का लक्ष्य हासिल होना मुश्किल
01-May-2025 10:48 AM
नई दिल्ली। यद्यपि केन्द्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना सहित देश के नौ प्रमुख उत्पादक राज्यों में कुल मिलाकर 13.22 लाख टन अरहर (तुवर) की खरीद करने की स्वीकृति प्रदान की है और इसके लिए प्रयास भी तेज कर दिया है
लेकिन अब तक हुई खरीद से संकेत मिलता है कि वास्तविक मात्रा इस स्वीकृत स्तर से काफी पीछे रह जाएगी। प्राप्त सूचना के अनुसार 22 अप्रैल 2025 तक केन्द्रीय बफर स्टॉक के लिए 3.92 लाख टन तुवर की खरीद हुई थी।
2024-25 के खरीफ सीजन हेतु तुवर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 7550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। आमतौर पर प्रमुख उत्पादक राज्यों में जनवरी से अप्रैल तक की अवधि को तुवर की आपूर्ति का पीक सीजन माना जाता है और इसके बाद थोक मंडियों में इसकी आवक कमजोर पड़ने लगती है।
हालांकि सरकार ने तुवर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है और इस बार प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश- म्यांमार में इसका उत्पादन भी बेहतर हुआ है लेकिन वहां भारतीय बाजार भाव में होने वाले बदलाव के अनुरूप तुवर का निर्यात ऑफर मूल्य घटता- बढ़ता रहा है।
अफ्रीकी देशों और खासकर मोजाम्बिक तथा मलावी में तुवर का निर्यात योग्य अधिशेष स्टॉक बहुत कम रह गया है जबकि इसकी नई फसल अगस्त से पहले नहीं आएगी।
देश के प्रमुख उत्पादक प्रांतों- कर्नाटक एवं महाराष्ट्र की मंडियों में तुवर की आवक हो रही है। फिलहाल सम्पूर्ण दाल-दलहन बाजार में सुस्ती और नरमी का माहौल बना हुआ है इसलिए दलहनों की खरीद में सरकारी एजेंसियों को आगे सहायता मिल सकती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि अच्छे आयात के बीच घरेलू बाजार में दलहनों और खासकर तुवर के दाम में किस तरह का परिवर्तन होता है।
पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान तुवर के घरेलू उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है जिससे इसकी कीमतों पर दबाव बढ़ गया।लेकिन आपूर्ति का पीक सीजन समाप्त होने के बाद इसके मूल्य में आने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखना आवश्यक होगा।
केन्द्र सरकार पहले ही तुवर, उड़द एवं मसूर की 100 प्रतिशत मात्रा खरीदने का संकल्प व्यक्त कर चुकी है। लेकिन फिलहाल मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत तुवर की खरीद की जा रही है।
यदि इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो बफर स्टॉक का स्तर ऊंचा उठाने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) स्कीम के तहत घरेलू बाजार में प्रचलित मूल्य पर इसकी खरीद शुरू करने पर विचार किया जा सकता है। आंध्र प्रदेश में तुवर की खरीद की अवधि 22 मई तक बढ़ा दी गई है।
