नए माल की आपूर्ति में बाधा पड़ने से सफेद चावल के निर्यातकों का संकट बढ़ने की आशंका

23-Nov-2024 01:54 PM

नई दिल्ली । पंजाब के बाद अब उड़ीसा तथा छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में धान की कस्टम मिलिंग के लिए चार्ज बढ़ाने की मांग के साथ राइस मिलर्स द्वारा धान की प्रोसेसिंग रोके जाने से चावल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और इसका घरेलू बाजार भाव तेज होने लगा है। इससे सफेद चावल के निर्यातकों को भारी परेशानी होने की आशंका है।

शिपमेंट के लिए जहाजों पर माल की लोडिंग में देर होने से निर्यातकों को आर्थिक नुकसान होगा। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की विनिमय दर कमजोर पड़ने से भी समस्या उत्पन्न हो सकती है। घरेलू प्रभाग में चावल का भाव ऊंचा चल रहा है जिससे वैश्विक निर्यात बाजार में कीमतों को प्रतिस्पर्धी स्तर पर बरकरार रखने में निर्यातकों को भारी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

विदेशी आयातकों को उम्मीद थी कि भारत में नए माल की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने पर चावल के दाम में गिरावट आएगी इसलिए वे ऊंचे भाव पर इसकी खरीद से हिचक रहे थे और अब भी उसका उत्साह नहीं बढ़ा है। 

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा जैसे राज्यों से चावल की विशाल मात्रा का निर्यात होता है। इसी तरह तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु के साथ-साथ पश्चिम बंगाल से भी चावल बाहर भेजा जाता है।

राइस मिलर्स का कहना है कि धान की कस्टम मिलिंग के लिए सरकार ने जो रेट नियत किया है वह बहुत कम है और इसमें व्यावहारिक इजाफा होना चाहिए।

सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत हो रही है लेकिन जब तक मांग पूरी नहीं होती तब तक धान की प्रोसेसिंग बंद रह सकती है। इसके अलावा चावल के भंडारण के लिए भी सरकार से सहयोग- समर्थन देने का आग्रह किया जा रहा है।  

5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल का भाव  वैश्विक बाजार में स्थिर या नरम बना हुआ है और इसकी मांग भी कमजोर देखी जा रही है। उड़ीसा में धान की मिलिंग चार्ज बढ़ाने की जोरदार मांग उठ रही है और सामान्य औसत क्वालिटी वाले धान की ही आपूर्ति करने के लिए कहा जा रहा है ताकि चावल की रिकवरी दर बेहतर रह सके। सरकार कस्टम मिल्ड चावल की आपूर्ति को धीमी गति से स्वीकार कर रही है इसलिए मिलर्स को इसके भंडारण में कठिनाई हो रही है।