नई फसल की आपूर्ति एवं भारी आयात से तुवर की कीमतों पर दबाव पड़ने के आसार
01-Feb-2025 01:19 PM
मुम्बई । खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख दलहन फसल- अरहर (तुवर) का भाव अपने शीर्ष स्तर की तुलना में घटकर अब काफी नीचे आ गया है क्योंकि एक तो नई घरेलू फसल की जोरदार आवक शुरू हो गई है और दूसरे, विदेशों से रिकॉर्ड मात्रा में इसका आयात भी हुआ है जो अभी जारी है।
सरकार ने इस महत्वपूर्ण दलहन के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है जिससे इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति आगे सुगम बनी रहेगी।
म्यांमार में नई फसल के आने से भारत में आयात की निरंतरता बनी रहेगी। वहां करीब 3 लाख टन तुवर का उत्पादन होने का अनुमान है।
वर्ष 2024 में पीली मटर, तुवर, उड़द एवं देसी चना के साथ-साथ मसूर का विशाल आयात होने से घरेलू प्रभाग में दलहनों की उपलब्धता बढ़ गई और कीमतों में नरमी का माहौल बनने लगा।
केन्द्र सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि पंचवर्षीय औसत की तुलना में तुवर का उत्पादन 2022-23 में 13.6 प्रतिशत तथा 2023-24 के सीजन में 10.8 प्रतिशत घट गया।
तुवर फसल की कटाई नवम्बर से जनवरी के बीच होती है इसलिए इसकी पैदावार में गिरावट का असर अगले वित्त वर्ष की खाद्य महंगाई पर पड़ता है।
पिछले दो सीजन के कमजोर उत्पादन के कारण इसका बाजार भाव अत्यन्त ऊंचे स्तर पर बरकरार रहा। 2024-25 सीजन के लिए कृषि मंत्रालय ने 35 लाख टन तुवर के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया है लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र का मानना है कि वास्तविक उत्पादन इससे 2-3 लाख टन अधिक हो सकता है।
अन्य दलहन फसलों की कीमतों में गिरावट आने से तुवर की मांग घट गई है और इसलिए इसके दाम पर भी दबाव पड़ने लगा है। सरकार ने 2024-25 सीजन के लिए तुवर का न्यूनतम समर्थन 7550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि थोक मंडी भाव भी घटकर इसके आसपास आ गया है।
म्यांमार तथा अफ्रीकी देशों से इसका आयात जारी है। लेकिन देसी चना एवं मसूर के आयात में भारतीय व्यापारियों की दिलचस्पी घटने लगी है क्योंकि इसका घरेलू बाजार मूल्य भी नरम पड़ गया है।
