नम मौसम के कारण खरीफ फसलों पर कीड़ों-रोगों का प्रकोप
20-Aug-2025 04:05 PM
नई दिल्ली। सिर्फ पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों को छोड़कर देश के अन्य अधिकांश भागों में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा सामान्य औसत से अधिक हुई है जिसमें मध्यवर्ती, पश्चिमी, दक्षिणी एवं पश्चिमोत्तर क्षेत्र शामिल है।
अत्यन्त मूसलाधार वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ आ गई और खेत जलमग्न हो गए जिससे वहां खरीफ फसलों को नुकसान होने की सूचना मिल रही है।
इसके अलावा आसमान पर बादल छाए रहने और मौसम नम होने से खरीफ फसलों पर कीड़ों-रोगों का आघात भी बढ़ता जा रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए किसानों को बड़े पैमाने पर कीटनाशी रसायनों का छिड़काव करना पड़ रहा है जिससे लागत खर्च में बढ़ोत्तरी हो रही है और साथ ही साथ फसलों के दाने में इन रसायनों का अवशेष भी ज्यादा मौजूद रहने की संभावना है जो इसका उपयोग करने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
कीड़ों-रोगों का प्रकोप ज्यादा आद्रता वाले नम मौसम में तेजी से फैलता है और इससे फसलों को गंभीर नुकसान है। मौसम विभाग के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर इस बार मानसून की वर्षा सामान्य औसत के करीब हुई है जबकि आगे इसमें बढ़ोत्तरी हो सकती है।
बेहतर वर्षा की वजह से खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में इस बार पिछले वर्ष से करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन बाढ़ वर्षा एवं रोगों-कीड़ों का प्रकोप भी जारी है।
पिछले साल के मुकाबले इस बार धान तथा उत्पादन क्षेत्र में शानदार बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। धान का उत्पादन क्षेत्र पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के करीब पहुंच गया है जबकि मक्का का बिजाई क्षेत्र उससे काफी आगे निकल चुका है।
अन्य खरीफ फसलों की बिजाई में मिश्रित रुख देखा जा रहा है। कुछ फसलों के रकबे में थोड़ी-बहुत बढ़ोत्तरी हुई है तो अन्य फसलों का क्षेत्रफल घट गया है। बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है मगर इसकी तीव्रता में कमी आ गई है।
कीड़ों-रोगों के आघात से खरीफ फसलों को बचाना आवश्यक है अन्य उत्पादन में गिरावट आ सकती है। भारत खासकर दलहन-तिलहन फसलों की पैदावार में कमी को नहीं झेल सकता है
क्योंकि इससे खाद्य तेलों एवं दलहनों का आयात बढ़ जाएगा जबकि पहले से ही यह आयात रिकॉर्ड स्तर का हो रहा है जिस पर भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है।
