नेपाल से आठ महीनों में 5.21 लाख टन खाद्य तेल भारत पहुंचा
14-Aug-2025 04:50 PM
मुम्बई। भारत का उत्तरी पड़ोसी देश- नेपाल यद्यपि तिलहन-तेल का अत्यन्त सीमित उत्पादन करता है मगर विदेशों से क्रूड खाद्य तेलों का आयात करके अपनी इकाइयों में उसकी प्रोसेसिंग करता है और फिर रिफाइंड खाद्य तेलों का अधिकांश भाग भारत को निर्यात कर देता है।
दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) संधि के अंतर्गत नेपाल से भारत में आयातित खाद्य तेल पर सीमा शुल्क नहीं लगता है और नेपाल इस छूट का नाजायज फायदा उठा रहा है। इससे भारतीय रिफाइनर्स को काफी नुकसान हो रहा है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती आठ महीनों में यानी नवम्बर 2024 से जून 2025 के दौरान नेपाल से भारत में कुल करीब 5.21 लाख टन खाद्य तेल का निर्यात हुआ इसमें रिफाइंड श्रेणी का पामोलीन, सोया तेल एवं सूरजमुखी तेल के साथ सरसों- रेपसीड तेल भी शामिल है।
नेपाल ने भारत को नवम्बर 2024 में करीब 23 हजार टन, दिसम्बर में 44 हजार टन, जनवरी 2025 में 71 हजार टन, फरवरी में 78 हजार टन, मार्च में 75 हजार टन, अप्रैल में 83 हजार टन, मई में 80 हजार टन तथा जून में 67 हजार टन खाद्य तेल का निर्यात किया था।
दिलचस्प तथ्य यह है कि नेपाल में सरसों-रेपसीड का उत्पादन बहुत कम होता है और वह भारत से इसे मंगाता है। थोड़ी-बहुत मात्रा में वहां बाहर से भी रेपसीड तेल मंगाया जाता है। नेपाल का ध्यान मुख्यतः रिफाइंड सोयाबीन तेल के निर्यात पर केन्द्रित रहता है।
आंकड़ों से इसकी पुष्टि होती है। वहां से भारत को नवम्बर 2024 में 16 हजार टन एवं दिसम्बर में 36 हजार टन रिफाइंड सोयाबीन तेल भेजा गया था जबकि उसकी मात्रा बढ़कर जनवरी 2025 में 62 हजार टन, फरवरी में 70 हजार टन, मार्च में 67 हजार टन, अप्रैल में 77 हजार टन एवं मई में 75 हजार टन पर पहुंच गई।
इसके मुकाबले आरबीडी पामोलीन, रिफाइंड सूरजमुखी तेल एवं सरसों- रेपसीड तेल का निर्यात काफी कम होता है। नेपाल में ब्राजील एवं अर्जेन्टीना के साथ-साथ चीन से भी क्रूड सोयाबीन तेल का आयात किया जाता है। स्वदेशी उद्योग नेपाली खाद्य तेलों के आयात पर अंकुश लगाने की जोरदार मांग कर रहा है।
