निर्यात से पूर्व चावल के स्रोत का पता लगाना कस्टम विभाग के दायरे से बाहर
06-Dec-2024 04:32 PM
हैदराबाद । आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों से कथित तौर पर पीडीएस वाले चावल का बड़े पैमाने पर गैर कानूनी ढंग से विदेशों में निर्यात होने का मामला जब सामने आया और कस्टम विभाग द्वारा बंदरगाह अधिकारियों पर इस कांड में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल होने का आरोप लगाया गया तब इसकी सफाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। काकीनाडा बंदरगाह से पीडीएस वाले चावल के निर्यात की खेप पकड़ी गई थी।
विजयवाड़ा के कस्टम कमिश्नर ने कहा है कि काकीनाडा एंकरेज पोर्ट के माध्यम से निर्यात की अनुमति दिए जाने से पूर्व चावल के स्रोत का पता लगाने में सीमा शुल्क विभाग की कोई भूमिका नहीं होती है।
एंकरेज (लंगर वाले) बंदरगाह पर विभाग की भूमिका तभी आरम्भ होती है जब चावल कस्टम के अधिसूचित क्षेत्र में पहुंच जाता है। कस्टम कमिश्नर ने पीडीएस चावल के तथाकथित गैर कानूनी निर्यात को रोकने के लिए राज्य सरकार को बिना शर्त हर संभव सहयोग समर्थन देने का आश्वासन दिया।
उनका कहना ता कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) वाले चावल का निर्यात होना गैर कानूनी है और इस पर निश्चित रूप से रोक लगनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार जिस तरह का सहयोग-समर्थन मांगेगी उसे वह प्रदान किया जाएगा।
कमिश्नर का कहना था कि नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के आधार पर ही चावल को बंदरगाह में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी।
अगस्त 2024 में कुछ चेक पोस्ट बनाए गए थे लेकिन फिर भी गैर कानूनी चावल के निर्यात की आशंका बरकरार है। चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष ने कहा है कि पीडीएस वाले चावल का निर्यात बंद होना चाहिए और इसके शिपमेंट की रोक थाम के लिए सभी सम्बद्ध पक्षों के साथ मिलकर काम करने के लिए एसोसिएशन तैयार है।
