नवम्बर-जुलाई में 107.57 लाख टन खाद्य तेल का आयात

14-Aug-2025 03:50 PM

मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि चालू मार्केटिंग सीजन के शुरुआती दो महीनों में यानी नवम्बर 2024 से जुलाई 2025 के दौरान देश में कुल मिलाकर करीब 107.57 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ जो 2023-24 सीजन की समान अवधि के आयात 119.35 लाख टन से काफी कम है।

समीक्षाधीन अवधि के दौरान क्रूड खाद्य तेल का आयात 104.17 लाख टन से लुढ़ककर 97.69 लाख टन तथा रिफाइंड खाद्य तेल का आयात 15.19 लाख टन से घटकर 9.88 लाख टन पर अटक गया। 

जुलाई 2025 में खाद्य तेलों का आयात बढ़कर 15.48 लाख टन पर पहुंचा जबकि इससे पूर्व जून में 15.31 लाख टन, मई में 11.75 लाख टन, अप्रैल में 8.63 लाख टन, मार्च में 9.71 लाख टन, फरवरी में 8.86 लाख टन तथा जनवरी 2025 में 10.08 लाख टन खाद्य तेल मंगाया गया था। इसके आयात की मात्रा नवम्बर 2024 में 15.90 लाख टन रही थी जो दिसम्बर 2024 में घटकर 11.86 लाख टन रह गई।

महत्वपूर्ण बात यह है कि रिफाइंड खाद्य तेल का आयात जून में 1.64 लाख टन के करीब रहा था जो जुलाई में लुढ़ककर मात्र 5 हजार टन रह गया।

लेकिन इसी अवधि में क्रूड खाद्य तेल का आयात 13.68 लाख टन से बढ़कर 15.43 लाख टन पर पहुंच गया। आगामी महीनों में भी खाद्य तेलों का भारी आयात जारी रहने की संभावना है क्योंकि त्यौहारी सीजन आरंभ हो गया है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नवम्बर 2023 जुलाई 2024 की तुलना में नवम्बर 2024 जुलाई 2025 के दौरान भारत में क्रूड एवं रिफाइंड श्रेणी के पाम तेल का कुल आयात 68.45 लाख टन से घटकर 51.41 लाख टन तथा सूरजमुखी तेल का आयात 28.30 लाख टन से गिरकर 20.93 लाख टन पर सिमट गया लेकिन सोयाबीन तेल का आयात 22.60 लाख टन से उछलकर 35.23 लाख टन पर पहुंच गया।

जून की तुलना में जुलाई के दौरान पाम तेल का आयात 9.56 लाख टन से 8.56 लाख टन तथा  सूरजमुखी तेल का आयात 2.16 लाख टन से गिरकर 2.00 लाख टन पर अटक गया जबकि सोयाबीन तेल का आयात 3.60 लाख टन से बढ़कर 4.92 लाख टन पर पहुंच गया। 

उद्योग-व्यापार समीक्षकों का कहना है कि 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के दौरान सोयाबीन तेल का आयात 60 प्रतिशत उछलकर 55 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकता है जबकि पाम तेल का आयात घटकर गत पांच वर्षों के निचले स्तर पर आ सकता है। सूरजमुखी तेल का आयात भी कम होगा।