न्यूज़ कैप्सूल
01-Oct-2025 08:11 AM
★ राज्यों में दलहनों की फसल स्थिति और इसका बाज़ारों पर असर। नुकसान अधिक, भाव बढ़ने की ओर कर रहे इशारा।
★ केवल कर्नाटक ही नहीं, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों और राजस्थान में इस वर्ष लगभग पूरे खरीफ सीज़न में बारिश लगातार होती रही। राज्यों में दलहनों की फसल स्थिति और इसका बाज़ारों पर असर। नुकसान अधिक, भाव बढ़ने की ओर कर रहे इशारा।
★ केवल कर्नाटक ही नहीं, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों और राजस्थान में इस वर्ष लगभग पूरे खरीफ सीज़न में बारिश लगातार होती रही। शुरुआत में यह फसल के लिए अच्छी थी, परन्तु बाद में यह मुसीबत बन गई।
★ सबसे अधिक असर दलहनी फसलों – उड़द और मूंग – पर पड़ा। मूंग में हम आत्मनिर्भर हैं परंतु उड़द के मामले में अभी भी विदेशों पर निर्भर। सरकारी गोदामों में मूंग का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, परन्तु उड़द का न के बराबर।
★ जैसे कि पहले भी कई बार आई-ग्रेन इंडिया में उड़द में तेजी की रिपोर्ट दी, ठीक वैसे ही बाज़ार चल रहे हैं। अन्य दलहनों के मुकाबले उड़द की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई। आगे चलकर जैसे-जैसे नई फसल आएगी, बारिश का असल असर पता लगेगा। बारिश से हुए नुकसान के कारण खराब माल बाज़ारों में आएगा, जिससे अच्छे माल की स्वाभाविक मांग निकल सकती है।
★ निर्यातक भी इसी मौके के इंतज़ार में हैं, भविष्य में उड़द की कीमतों में वृद्धि की प्रबल संभावनाएं। मूंग में भी अच्छे माल के भाव मिलगत कम हो सकते हैं, भाव बढ़ने की उम्मीद है।
★ तूर उत्पादक क्षेत्रों में भी जोरदार बारिश हुई है। परन्तु फसल लंबी अवधि की होने के कारण उत्पादकता के बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। जहाँ बारिश हुई है, वहाँ फसल का विकास तनाव में हो रहा है। बारिश के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पिछले 2 दिनों में तूर की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई। फसल को नुकसान होता देख निर्यातक भी भाव बढ़ा सकते हैं।
★ निर्यातकों की फसल पर पैनी नज़र।
★ कुल मिलाकर विभिन्न राज्यों से आ रही रिपोर्ट देखें तो तीनों दलहनी फसलें प्रभावित होती दिख रही हैं, जिसका असर कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है।शुरुआत में यह फसल के लिए अच्छी थी, परन्तु बाद में यह मुसीबत बन गई।
★ सबसे अधिक असर दलहनी फसलों – उड़द और मूंग – पर पड़ा। मूंग में हम आत्मनिर्भर हैं परंतु उड़द के मामले में अभी भी विदेशों पर निर्भर। सरकारी गोदामों में मूंग का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, परन्तु उड़द का न के बराबर।
★ जैसे कि पहले भी कई बार आई-ग्रेन इंडिया में उड़द में तेजी की रिपोर्ट दी, ठीक वैसे ही बाज़ार चल रहे हैं। अन्य दलहनों के मुकाबले उड़द की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट नहीं आई। आगे चलकर जैसे-जैसे नई फसल आएगी, बारिश का असल असर पता लगेगा। बारिश से हुए नुकसान के कारण खराब माल बाज़ारों में आएगा, जिससे अच्छे माल की स्वाभाविक मांग निकल सकती है।
★ निर्यातक भी इसी मौके के इंतज़ार में हैं, भविष्य में उड़द की कीमतों में वृद्धि की प्रबल संभावनाएं। मूंग में भी अच्छे माल के भाव मिलगत कम हो सकते हैं, भाव बढ़ने की उम्मीद है।
★ तूर उत्पादक क्षेत्रों में भी जोरदार बारिश हुई है। परन्तु फसल लंबी अवधि की होने के कारण उत्पादकता के बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। जहाँ बारिश हुई है, वहाँ फसल का विकास तनाव में हो रहा है। बारिश के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पिछले 2 दिनों में तूर की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई। फसल को नुकसान होता देख निर्यातक भी भाव बढ़ा सकते हैं।
★ निर्यातकों की फसल पर पैनी नज़र।
★ कुल मिलाकर विभिन्न राज्यों से आ रही रिपोर्ट देखें तो तीनों दलहनी फसलें प्रभावित होती दिख रही हैं, जिसका असर कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है।
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★Crop Situation of Pulses in Different States and Its Impact on Markets. Heavy Losses, Prices Likely to Rise.
Not only Karnataka, but also parts of Maharashtra, Gujarat, Madhya Pradesh, and Rajasthan have seen continuous rainfall throughout this year’s kharif season. Initially, the rains were beneficial for crops, but later they turned into a problem.
The biggest impact has been on pulses – urad (black gram) and moong (green gram). India is self-sufficient in moong, but still dependent on imports in the case of urad. Government warehouses have adequate stocks of moong, but almost negligible stock of urad.
★As reported earlier several times by I-Grain India, urad prices have shown firmness, and the same trend is visible now. Compared to other pulses, urad has not seen a major price decline. Going forward, as new crops start arriving, the real impact of rains will be visible. Due to weather damage, poor-quality produce will come into the market, which is likely to create strong demand for good-quality stocks.
★Exporters are also waiting for such an opportunity, and there are strong chances of urad prices rising in the future. In moong too, the supply of premium-quality produce may remain limited, pushing prices upward.
Tur (pigeon pea) growing regions have also received heavy rainfall. However, since tur is a long-duration crop, it is difficult to assess productivity at this stage. In areas with excess rains, crop growth is under stress. Over the last two days, tur prices have already increased due to weather concerns. If damage continues, exporters may further raise prices.
★Exporters are keeping a close watch on the crop situation.
★Overall, reports from different states indicate that all three major kharif pulses – urad, moong, and tur – are under stress, and the impact on prices is inevitable.
