नियत लक्ष्य के मुकाबले अब तक 48 प्रतिशत सोयाबीन की सरकारी खरीद

29-Jan-2025 08:09 PM

नई दिल्ली। बेहतर उत्पादन एवं कमजोर मांग के कारण सोयाबीन का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे आने के कारण किसानों में व्याप्त असंतोष को दूर करने के लिए केन्द्र सरकार को मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत इसकी खरीद के लिए बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा।

विभिन्न राज्यों में अलग-अलग आंकड़ों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर कुल मिलाकर 33.85 लाख टन सोयाबीन की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया जिसमें से अब तक करीब 16.30 लाख टन या 48 प्रतिशत की खरीद हो चुकी है।

2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4892 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि 2023-24 सीजन में 4600 रुपए प्रति क्विंटल नियत हुआ था। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान नियत लक्ष्य के सापेक्ष अब तक सोयाबीन की खरीद महाराष्ट्र में सर्वाधिक 7.80 लाख टन या 55 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 6.26 लाख टन या 45 प्रतिशत, राजस्थान में 81 हजार टन या 28 प्रतिशत तेलंगाना में 83 हजार टन या 99 प्रतिशत तथा अन्य प्रांतों में 66 हजार टन या 29 प्रतिशत पूरी हुई है। 

महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना एवं अन्य राज्यों में सोयाबीन की खरीद का अभियान लगभग समाप्त हो चुका है मगर कर्नाटक एवं गुजरात में यह 9 फरवरी तक जारी रहेगा। 

निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 50 प्रतिशत से भी कम सोयाबीन की खरीद होने से किसानों में असंतोष बरकरार है। महाराष्ट्र में तो पंजीकृत किसानों से भी सोयाबीन नहीं खरीदा जा रहा है।

चूंकि थोक मंडियों में भाव घटकर काफी नीचे आ गया है और सरकारी खरीद भी बंद हो गई है इसलिए किसानों को आगामी समय में औने-पौने दाम पर अपना तिलहन बेचने के लिए विवश होना पड़ेगा।

देश के तीनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में सोयाबीन का भाव एमएसपी से 500-600 रुपए प्रति क्विंटल नीचे है।