नियत लक्ष्य से अधिक खरीद होने पर भी गेहूं का निर्यात खुलना मुश्किल
28-Apr-2025 01:38 PM
नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में गेहूं की पैदावार एवं सरकारी खरीद में इस बार अच्छी बढ़ोत्तरी होने की संभावना है जिसके स्पष्ट संकेत भी मिल रहे हैं। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि गेहूं की खरीद 313 लाख टन के नियत लक्ष्य तक या उससे ऊपर पहुंचने के बावजूद इसके निर्यात की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सरकार की प्राथमिकता केन्द्रीय पूल के साथ-साथ घरेलू प्रभाग में भी गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने की है। कुछ राज्यों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गेहूं का सामान्य वितरण करने में अभी कठिनाई हो रही है इसलिए सरकार उसमें बेहतर आवंटन भी सुनिश्चित करना चाहती है।
उल्लेखनीय है कि भारत से गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर मई 2022 से ही रोक लगी हुई है और इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है।
पिछले तीन वर्षों से केन्द्रीय पूल के लिए नियत लक्ष्य की तुलना में गेहूं की सरकारी खरीद बहुत कम हो रही है और इसका घरेलू बाजार भाव काफी ऊंचा चल रहा है। लेकिन चालू वर्ष के दौरान परिदृश्य में कुछ बदलाव आने के आसार हैं। वैसे सरकारी स्तर पर थोड़ा-बहुत निर्यात जारी रहा।
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब तक प्राप्त संकेतों से प्रतीत होता है कि 2024-25 सीजन के दौरान गेहूं का उत्पादन अच्छा होगा और इसकी सरकारी खरीद में भी बढ़ोत्तरी होगी।
सरकार का ध्यान केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक बढ़ाने पर केन्द्रित है ताकि आवश्यकता पड़ने पर खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत कम से कम 60-70 लाख टन गेहूं को उतारना संभव हो सके।
इसके अलावा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत पीडीएस में गेहूं एवं चावल के आवंटन को दोबारा एडजस्ट करना भी आवश्यक है। कुछ राज्यों में लाभार्थियों को गेहूं के बजाए चावल का वितरण किया जा रहा है।
यदि गेहूं चावल के वितरण को 2022 के स्तर पर पहुंचाना है तो प्रति वर्ष 35-40 लाख टन अतिरिक्त गेहूं की जरूरत पड़ेगी। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ओएमएसएस के तहत करीब 30 लाख टन सरकारी गेहूं की बिक्री हुई जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में इस योजना के अंतर्गत लगभग 100 लाख टन गेहूं बेचा गया था।
