News Capsule/न्यूज कैप्सूल: FCI गेहूं बिक्री टेंडर में पंजाबी तड़का, असम की चाय की महक

12-Jan-2026 10:36 AM

News Capsule/न्यूज कैप्सूल: FCI गेहूं बिक्री टेंडर में पंजाबी तड़का, असम की चाय की महक
★ भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने शुक्रवार को 1 लाख टन गेहूं की बिक्री के लिए नया टेंडर जारी किया। हालांकि आवंटन के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि यह टेंडर कुछ चुनिंदा राज्यों को ध्यान में रखकर जारी किया गया है।
★ कुल 1 लाख टन के टेंडर में से 25,000 टन यानी 25 प्रतिशत पंजाब को आवंटित किए गए हैं, जबकि असम को 14,000 टन मिला है। इस तरह पंजाब और असम को मिलाकर करीब 39,000 टन गेहूं दिया गया है, जो कुल आवंटन का लगभग 40 प्रतिशत बैठता है।
★ अन्य राज्यों में हरियाणा को 9,500 टन और उत्तर प्रदेश को केवल 5,300 टन का आवंटन किया गया है। गेहूं पर निर्भरता के लिहाज से पंजाब के बाद हरियाणा का स्थान आता है, जबकि अन्य राज्यों की भागीदारी अपेक्षाकृत सीमित नजर आती है।
★ यदि इस टेंडर के वितरण पैटर्न को बारीकी से देखा जाए तो साफ दिखता है कि यह बिक्री मुख्य रूप से पंजाब और आंशिक रूप से हरियाणा को ध्यान में रखकर की गई है। अन्य राज्यों की रुचि कम दिखाई दे रही है, जिसका एक बड़ा कारण खुले बाजार में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता माना जा रहा है।
★ पिछले OMSS टेंडर में भी यही रुझान देखने को मिला था, जहां खरीद का बड़ा हिस्सा पंजाब और हरियाणा से आया था, जबकि बाकी राज्यों की भागीदारी बेहद सीमित रही।
★ गेहूं कारोबार से जुड़े लोगों के बीच OMSS की जरूरत को लेकर मतभेद हैं। एक वर्ग का मानना है कि फिलहाल बाजार में गेहूं आसानी से उपलब्ध है, ऐसे में सरकार द्वारा बिक्री की खास जरूरत नहीं थी। वहीं दूसरा वर्ग मानता है कि OMSS जरूरी था ताकि कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके और भविष्य में संभावित दबाव से बचा जा सके।
★ अब बाजार की नजरें बुधवार की नीलामी पर टिकी हैं। चूंकि टेंडर की मात्रा केवल 1 लाख टन है, इसलिए यह संभावना जताई जा रही है कि बिक्री ऊंचे दामों पर हो सकती है। टेंडर की घोषणा के बाद ही गेहूं की कीमतों में तेजी देखी गई है।
★ कुल मिलाकर, बुधवार की नीलामी के नतीजे ही यह साफ करेंगे कि सरकार का यह कदम बाजार के लिए कितना जरूरी था और किस राज्य की मांग वास्तव में कितनी मजबूत है।