रूई का आयात बढ़कर 39 लाख गांठ पर पहुंचने का अनुमान
18-Aug-2025 12:06 PM
मुम्बई। कमजोर घरेलू उत्पादन के कारण 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान भारत में रूई का आयात उछलकर 39 लाख गांठ पर पहुंच जाने का अनुमान है जो 2023-24 सीजन के सकल आयात 15.20 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) के दोगुने से भी ज्यादा है
एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव कुछ नीचे रहने तथा मिलों में मिलावट रहित रूई की मांग तेजी से बढ़ने के कारण आयात में इजाफा हो रहा है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि रूई का घरेलू भाव वैश्विक बाजार मूल्य से 10-12 प्रतिशत ऊंचा चल रहा है इसलिए भारतीय मिलर्स विदेशों से भारी मात्रा में इसका आयात कर रहे हैं। देश में रूई का आयात 39 लाख गांठ की सीमा को पार करते हुए 40 लाख गांठ के करीब पहुंच रहा है।
इससे पूर्व 2022-23 के मार्केटिंग सीजन में रूई का आयात 31 लाख गांठ पर पहुंचा था जब रूई का घरेलू बाजार भाव उछलकर 1 लाख रुपए प्रति कैंडी (356 किलो) के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
अध्यक्ष के मुताबिक भारतीय कंपनियों ने अगले मार्केटिंग सीजन की डिलीवरी के लिए भी रूई का आयात अनुबंध करना शुरू कर दिया है। नया मार्केटिंग सीजन अक्टूबर 2025 में आरंभ होने जा रहा है।
रूई का अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य अब भी नीचे है। सिर्फ पिछले 10 दिनों में है करीब 1.50 लाख गांठ रूई का आयात अनुबंध हो गया जिसकी आपूर्ति अक्टूबर-सितम्बर 2025 के दौरान होगी।
वर्तमान समय में ब्राजील की रूई का निर्यात ऑफर मूल्य 51,000 रुपए प्रति कैंडी चल रहा है जिसमें भारत के किसी भी बंदरगाह-तूतीकोरिन, मूंदड़ा एवं न्हावा शेवा आदि तक पहुंच का खर्च भी शामिल है। रूई पर 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है जिसे मिलाकर आयातित माल का खर्च 56000 रुपए प्रति कैंडी बैठ रहा है।
लेकिन सीधे निर्यात करने वाली कंपनियों को 4.4 प्रतिशत का ही सीमा शुल्क देना पड़ता है इसलिए उसे बाहर से आयात सस्ता पड़ता है। जुलाई के अंत तक देश में 33 लाख गांठ रूई का आयात हो चुका था।
