रूई के बकाया अधिशेष स्टॉक में 84 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का अनुमान
12-Jul-2025 12:40 PM
मुम्बई। एक अग्रणी व्यापारिक संगठन- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में कपास (रूई) का सकल बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़कर 55.59 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है
जो 2023-24 सीजन की समाप्ति पर उपलब्ध स्टॉक 30.19 लाख गांठ से 84 प्रतिशत ज्यादा है। एसोसिएशन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि कपास की जिनिंग-प्रेसिंग की मात्रा वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 311.40 लाख गांठ पर पहुंच सकती है जबकि पहले 301.19 लाख गांठ का अनुमान लगाया गया था।
एसोसिएशन ने कपास की प्रेसिंग मात्रा का अनुमान महाराष्ट्र में 5 लाख गांठ, गुजरात एवं तेलंगाना में 1.5-1.5 लाख गांठ तथा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हरियाणा एवं राजस्थान 1-1 लाख गांठ बढ़ा दिया है।
दरअसल थोक मंडियों में कपास की आपूर्ति में सुधार आने तथा सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के स्टॉक के बिक्री की रफ्तार बढ़ने के कारण प्रेसिंग की मात्रा में वृद्धि होने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि सरकारी एजेंसी द्वारा 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर लगभग 100 लाख गांठ रूई की खरीद की गई थी जिसमें से उसे 56 लाख गांठ की बिक्री करने में पहले ही सफलता मिल चुकी है। बिक्री की प्रक्रिया अब भी जारी है।
एसोसिएशन के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन में 1 अक्टूबर 2024 से 30 जून 2025 के बीच देश में कुल 356.76 लाख गांठ रूई की आवक हुई जिसमें 296.57 लाख गांठ का घरेलू उत्पादन 30 लाख गांठ का आयात एवं 30.19 लाख गांठ का पिछला बकाया स्टॉक शामिल था।
इस सकल उपलब्धता में से 233.50 लाख गांठ रूई की घरेलू खपत हुई और 15.25 लाख गांठ का निर्यात किया गया। इस तरह जून 2025 के अंत में 108.01 लाख गांठ रूई का अधिशेष स्टॉक बचा हुआ था।
इसके तहत कॉटन टेक्सटाइल मिलों के पास 32 लाख गांठ का स्टॉक मौजूद था जबकि शेष 76 लाख गांठ का स्टॉक सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, व्यापारियों,
जिनर्स एवं निर्यातकों आदि के पास उपलब्ध था। एसोसिएशन ने 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए रूई की कुल आपूर्ति का अनुमान 370.34 लाख गांठ से बढ़ाकर 380.59 लाख गांठ निर्धारित कर दिया है। इसी तरह रूई की घरेलू खपत का अनुमान भी 30 लाख गांठ से 3 लाख गांठ बढ़ाकर 308 लाख गांठ नियत किया गया है।
