रूई पर आयात शुल्क स्थगित होने से भारतीय उत्पादकों पर ज्यादा प्रभाव नहीं
22-Aug-2025 03:46 PM
अहमदाबाद। केन्द्र सरकार टैक्सटाइल उद्योग की मांग एवं कपड़ा मंत्रालय की सिफारिश को ध्यान में रख कर रूई के आयात पर लगे 11 प्रतिशत के सीमा शुल्क की वसूली को स्थगित रखने का निर्णय लिया है जो 19 अगस्त से लागू होकर 30 सितम्बर तक प्रभावी रहेगा।
हालांकि कुछ विश्लेषक मानते है कि अमरीकी टैरिफ के दबाव को ध्यान में रखकर सरकार ने शुल्क स्थगन की समयावधि को देखा जाना चाहिए। कपास के लिए 2024-25 का मौजूदा मार्केटिंग सीजन बिल्कुल अंतिम चरण में है।
थोक मंडियों में किसानी माल की नगण्य आवक हो रही है। आयात शुल्क से छूट 30 सितंबर तक दी गई है जबकि अक्टूबर से 2025-26 का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ होगा और तब रूई के नए माल की आवक शुरू होगी। इससे भारतीय किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा।
विदेशों से रूई का शुल्क मुक्त आयात होने से भारतीय टैक्सटाइल मिलों को राहत मिलेगी और वैश्विक निर्यात बाजार में भारतीय वस्त्र उत्पादों को प्रतिस्पर्धी मूल्य स्तर पर रखने में सहायता प्राप्त होगी।
अमरीका ने 27 अगस्त से भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है जिससे वहां भारत से वस्त्र उत्पादों का निर्यात प्रभावित होने की आशंका है।
अमरीका भारतीय वस्त्र उत्पादों का एक अग्रणी खरीदार है। चूंकि वहां अन्य आपूर्तिकर्ता देशों- चीन, पाकिस्तान, बांग्ला देश एवं वियतनाम आदि के उत्पादों पर कम टैक्स लगाया गया है इसलिए भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती एवं कठिनाई बढ़ जाएगी। इससे निपटने के लिए भारतीय वस्त्र उत्पादों का लागत खर्च घटाया जाना आवश्यक समझा गया।
भारतीय प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि सरकार अपने किसानों के हितों के साथ कभी कोई समझौता नहीं करेगी। किसानों का हित सरकार के लिए सर्वोपरि है। भारत में रूई का आयात मुख्यतः ब्राजील से हो रहा है जहां इसके नए माल की आवक शुरू हो गई है।
भारतीय रूई आयातकों को 40 दिनों के लिए सीमा शुल्क से छूट मिल गई है और वे इसका फायदा उठाने का हर संभव प्रयास अवश्य करेंगे। 1 अक्टूबर 2024 से 31 जुलाई 2025 के दौरान देश में करीब 33 लाख गांठ रूई का आयात हुआ जबकि अगस्त-सितम्बर में 10-15 लाख गांठ का अतिरिक्त आयात होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
