रूस से तिलहनों के निर्यात में भारी गिरावट

11-Jun-2025 10:45 AM

मास्को। पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान रूस से तिलहनों एवं वनस्पति तेलों के निर्यात में भारी गिरावट देखी जा रही है। वर्ष 2025 के शुरूआती पांच महीनों में यानी जनवरी से मई के दौरान रूस से तिलहनों का कुल निर्यात घटकर 10.71 लाख टन पर सिमट गया जो वर्ष 2024 की इसी अवधि के शिपमेंट से 22 प्रतिशत कम रहा। 

एक अग्रणी विश्लेषक फर्म द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 के आरंभिक पांच महीनों के दौरान रूस से सूरजमुखी बीज का निर्यात 7 प्रतिशत गिरकर 1.20 लाख टन पर अटक गया। इसके 85 प्रतिशत से अधिक भाग का निर्यात 'ईएईयू' देशों को किया गया। इसी तरह समीक्षाधीन अवधि के दौरान रूस से सोयाबीन का निर्यात 35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2.68 लाख टन पर सिमट गया। इसमें से 1.84 लाख टन का शिपमेंट चीन को किया गया और वह इसका प्रमुख खरीदार बना रहा। 

इसी तरह 2024 की तुलना में 2025 के शुरूआती पांच महीनों के दौरान रूस से रेपसीड का निर्यात 18 प्रतिशत घटकर 2.42 लाख टन रह गया जिसमें से 1.83 लाख टन का निर्यात बेलारूस को तथा 49 हजार टन का शिपमेंट चीन को किया गया। अलसी का निर्यात भी 15 प्रतिशत गिरकर 4.22 लाख टन पर अटक गया। चीन इसका सबसे प्रमुख खरीदार रहा जिसने 3.24 लाख टन का आयात किया। इसके बाद बेल्जियम द्वारा 34 हजार टन का आयात किया गया। 

रूस में अगले महीने से तिलहन फसलों की कटाई-तैयारी आरंभ होने वाली है और तब इसके निर्यात शिपमेंट की गति तेज होने लगेगी। वैसे भी रूस तिलहनों के बजाए उसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को ज्यादा प्राथमिकता देता है। पिछले साल मौसम की हालत पूरी तरह अनुकूल नहीं होने से रूस  से तिलहन फसलों की पैदावार आंशिक रूप से प्रभावित हुई थी। इस बार स्थिति कुछ बेहतर देखी जा रही है। चीन में रूसी तिलहनों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है।