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26-Oct-2026 04:36 PM
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष के लिए खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत आयोजित पहली ई-नीलामी में भारतीय खाद्य निगम द्वारा 1.06 लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया गया था जिसमें से 82 प्रतिशत भाग की खरीद मिलर्स / प्रोसेसर्स द्वारा की गई थी। लेकिन अब बिक्री का ऑफर 5 हजार टन घटाकर 1.01 लाख टन नियत किया गया है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि जिस समय अखिल भारतीय स्तर पर जून का औसत थोक बाजार (मंडी) भाव 2910 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा था तब मिलर्स / प्रोसेसर द्वारा कई राज्यों में 3100 रुपए प्रति क्विंटल के ऊंचे मूल्य पर सरकारी गेहूं की खरीद की गई लेकिन फिर भी खाद्य निगम ने बिक्री की मात्रा घटा दी है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स ने सरकार को साप्ताहिक ई-नीलामी में गेहूं की बिक्री की मात्रा नियमित रूप से बढ़ाते रहने का सुझाव दिया है क्योंकि खुली मंडियों में इसकी आपूर्ति उपलब्धता की स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है और सरकारी गेहूं पर मिलर्स की निर्भरता आगामी समय में अनवरत बढ़ती जाएगी।
एक अग्रणी संस्था- रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार मंडियों में उम्मीद के अनुरूप गेहूं की आवक नहीं हो रही है और इसलिए मिलर्स सरकारी गेहूं की अधिक से अधिक खरीद करना चाहते हैं। खाद्य निगम को बिक्री की मात्रा घटाने के बजाए बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। नया गेहूं मार्च अप्रैल में आएगा जबकि मिलर्स एवं व्यापारियों तथा किसानों के पास अपेक्षित मात्रा में इसका स्टॉक मौजूद नहीं है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।