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बासमती धान की ऊंची उपज दर से चावल का उत्पादन बढ़ने के आसार

26-Oct-2026 03:54 PM

बासमती धान की ऊंची उपज दर से चावल का उत्पादन बढ़ने के आसार

नई दिल्ली। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) के बासमती प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं एक मशहूर निर्यातक प्रतिष्ठान के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना है कि इस वर्ष प्रमुख उत्पादक राज्यों में दक्षिण पश्चिम मानसून की अच्छी वर्षा होने, मौसम की हालत अनुकूल रहने तथा किसानों द्वारा फसल की देखभाल बेहतर ढंग से किए जाने के कारण बासमती धान की औसत उपज दर में 5-10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। मानसून सीजन के दौरान और उसके बाद भी अच्छी बारिश होने से बासमती धान की फसल को फायदा हुआ जिससे इसकी हालत काफी अच्छी हो गई।

विश्लेषक के अनुसार बासमती चावल का घरेलू उत्पादन बढ़ना काफी महत्वपूर्ण एवं लाभदायक साबित हो सकता है क्योंकि इससे निर्यात योग्य स्टॉक में बढ़ोत्तरी होगी और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी। भारतीय बासमती चावल की वैश्विक मांग लम्बे समय तक बरकरार रहने की उम्मीद है। भारत से विशाल मात्रा में दुनिया के अनेक देशों को इसका निर्यात हो रहा है। इसमें पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देश, अमरीका तथा यूरोपीय देश मुख्य रूप से शामिल हैं। भारतीय चावल की क्वालिटी अच्छी और कीमत प्रतिस्पर्धी होती है। 

दुनिया के कम से कम 96 देशों में भारत से चावल का निर्यात होता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल अपना स्थायी मुकाम पहले ही बना चुका है और अब लगातार बाजार का विस्तार भी हो रहा है। वैसे तो भारत के लगभग सभी राज्यों में धान की खेती होती है लेकिन केवल पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा जम्मू कश्मीर (दो जिले) में उत्पादित धान को ही बासमती    का वैधानिक दर्जा प्राप्त है। भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है।