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26-Oct-2026 01:43 PM
मुम्बई। त्यौहारी सीजन की मांग एवं जरूरत (लिवाली) समाप्त होने के बाद चना के घरेलू बाजार भाव पर दबाव पड़ने की संभावना है क्योंकि सरकारी स्टॉक से इसकी नियमित बिक्री जारी है। पीली मटर कुछ सस्ती है और विदेशों से आयात भी हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया में नए चने की आवक शुरू हो गई है जबकि भारत में इस दलहन की बिजाई आरंभ हो चुकी है।
प्रमुख मंडियों में लगातार दूसरे सप्ताह चना के दाम में गिरावट दर्ज की गई। सरकारी एजेंसी- नैफेड ने अपने चने का लोअर बिड स्वीकार कर लिया। पहले बिक्री टेंडर में ऊंचा मूल्य सामने आ रहा था लेकिन अब खरीदार नीचे मूल्य का ऑफर दे रहे हैं।
इससे बाजार की धारणा में बदलाव हो रहा है। चना दाल का भाव भी नरम पड़ गया है। जिससे मिलर्स / प्रोसेसर्स को ऊंचे मूल्य पर चना खरीदने का प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है।
मूंदड़ा बंदरगाह पर चार जहाजों में कनाडा से 1,21,132 टन पीली मटर की खेप पहुंचे की सूचना मिल रही है। वैसे जनवरी-अगस्त 2026 के आठ महीनों में चना का आयात घटकर 6.55 लाख टन पर अटक गया जो वर्ष 2025 की समान अवधि के आयात 11.80 लाख टन से 44 प्रतिशत कम था। चना का बिजाई क्षेत्र इस बार 23 अक्टूबर तक 2.21 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल के क्षेत्रफल 3.77 लाख हेक्टेयर से 41 प्रतिशत कम है।