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26-Oct-2026 01:23 PM
मुम्बई। कम क्षेत्रफल में बिजाई होने तथा प्रतिकूल मौसम के प्रभाव से औसत उपज दर में गिरावट आने से गुजरात में इस इस वर्ष खरीफ कालीन मूंगफली का उत्पादन काफी घटने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि गुजरात देश में मूंगफली का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त हैं।
मुम्बई स्थित स्वदेशी तिलहन तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा गुजरात के प्रमुख उत्पादक जिलों में किए गए फील्ड सर्वे के बाद जो तथ्य सामने आया है उससे पता चलता है कि वहां मूंगफली का उत्पादन अधिकांश क्षेत्रों में घट सकता है।
'सी' के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 2025 की तुलना में खरीफ 2026 के दौरान गुजरात में मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 22.02 लाख हेक्टेयर से घटकर 20.71 लाख हेक्टेयर पर अटक गया और फसल की औसत उपज दर भी 1902 किलो प्रति हेक्टेयर से गिरकर 1608 किलो प्रति हेक्टेयर रह जाने की संभावना है। इसके आधार पर एसोसिएशन ने गुजरात में मूंगफली का कुल उत्पादन गत वर्ष के 41.88 लाख टन से लुढ़ककर इस बार 33.34 लाख टन रह जाने का अनुमान लगाया है।
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार शीतकालीन सीजन के दौरान राज्य के अमरेली, भावनगर, जामनगर, द्वारका, जूनागढ़, गिर सोमनाथ, पोरबंदर, राजकोट, मोरबी तथा सुरेन्दर नगर जिलों में मूंगफली का उत्पादन 31.82 लाख टन से लुढ़ककर 25.53 लाख टन पर सिमट जाने का अनुमान है।
इसी तरह कच्छ, साबरकंठा, अरावली, बनासकंठा एवं अन्य जिलों में मूंगफली का उत्पादन 10.06 लाख टन से घटकर 7.81 लाख टन रह जाने की संभावना है। नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो गई है। गुजरात के कई जिलों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य औसत से कम बारिश हुई।