ओएमसी द्वारा एथनॉल की खरीद में सहकारी चीनी मिलों को प्राथमिकता देने का निर्णय

23-Jan-2025 04:14 PM

नई दिल्ली । तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने पेट्रोल में मिश्रण के उद्देश्य से एथनॉल की खरीद में प्राइवेट क्षेत्र के बजाए सहकारी क्षेत्र की चीनी कंपनियों को विशेष प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है और इसके संकेत मिलने भी शुरू हो गए हैं।

2024 -25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के लिए इन कंपनियों ने 8.80 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति का जो नवीनतम टेंडर जारी किया है उसमें इस निर्णय की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रही है। केन्द्र सरकार सहकारिता क्षेत्र को विशेष बढ़ावा दे रही है। 

पेट्रोलियम कंपनियों के इस निर्णय से सहकारी चीनी मिलों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान देश में करीब 320 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था जिसमें सहकारी मिलों का योगदान लगभग 30 प्रतिशत रहा था। सहकारी मिलों को प्रथमिकता मिलने से प्राइवेट क्षेत्र की इकाइयों को कुछ कठिनाई हो सकती है। 

भारत में सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति कमजोर रहती है और अक्सर उसे घाटा उठाना पड़ता है। इसके लिए उसके प्रबंधन को जिम्मेदार माना जा सकता है।

सरकार को वित्तीय मदद के जरिए उसकी हालत स्थिर रखने का प्रयास करना पड़ता है। लेकिन अब सहकारिता मंत्रालय के नीति निर्माता सहकारी चीनी मिलों की क्षमता एवं कार्य कुशलता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। 

महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा जैसे राज्यों में सहकारी क्षेत्र में अनेक चीनी मिलें कार्यरत हैं लेकिन कुछ गिनी-चुनी इकाइयां ही लाभ कमाने की स्थिति में रहती है।

यदि पेट्रोलियम कंपनियां उसमें अधिक से अधिक मात्रा में एथनॉल की खरीद करती है तो उसकी वित्तीय स्थिति कुछ मजबूत हो सकती है। चीनी उत्पादन का सीजन अभी जारी है और एथनॉल की नियमित आपूर्ति की जा सकती है।