ऑस्ट्रेलिया में चना, और मसूर का शानदार उत्पादन होने के आसार
08-Oct-2025 04:49 PM
कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में चना और मसूर की फसल की हालत काफी अच्छी है और दोनों दलहनों का उत्पादन 18-18 लाख टन से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है जिससे इसके निर्यात योग्य स्टॉक में अच्छी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
शानदार उत्पादन की संभावना से वहां दलहनों के दाम पर हाल के सप्ताहों में दबाव पड़ा है। दक्षिण एशिया में मानसून की अच्छी वर्षा से भी ऑस्ट्रेलियाई बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर देखा जा रहा है।
दरअसल ऑस्ट्रेलिया से चना एवं मसूर का सर्वाधिक निर्यात दक्षिण एशियाई देशों में ही होता है जिसमें भारत, बांग्ला देश, पाकिस्तान, श्रीलंका एवं नेपाल आदि शामिल हैं।
इन देशों में पूर्व में आयातित दलहनों का अच्छा खासा स्टॉक मौजूद है। घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है और दलहनों का घरेलू उत्पादन भी बेहतर होने के आसार हैं।
भारत में मई 2025 से ही दलहनों के आयात की गति धीमी बनी हुई है जिससे प्रतीत होता है कि वहां मांग एवं आपूर्ति में काफी हद तक संतुलन बना हुआ है।
उधर वैश्विक बाजार में दलहनों की आपूर्ति एवं उपलब्धता में अच्छी बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिल रहे है और प्रमुख निर्यातक देशों को अपने उत्पाद का शिपमेंट बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीति अपनानी पड़ रही है।
रूस तथा कजाकिस्तान में सयुंक्त रूप से करीब 10 लाख टन मसूर का उत्पादन होने की उम्मीद है जबकि कनाडा में मटर का उत्पादन अनुमान 5 लाख टन बढ़ाकर 36 लाख टन निर्धारित किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया में चालू वर्ष के दौरान मसूर का उत्पादन उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर तथा चना का उत्पादन तीसरे सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इससे ऑस्ट्रेलिया के किसानों को ज्यादा इजाफा नहीं हो सकेगा। नवम्बर से जनवरी के दौरान आयात का पीक सीजन रहता है जबकि मई-जुलाई में ऑफ सीजन हो जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की नजर रमजान पर भी केन्द्रित है जब मुस्लिम बहुल देशों में खासकर चना और मसूर की मांग तेजी से बढ़ती है। लेकिन अभी वह समय दूर है।
इधर भारत में 31 मार्च 2026 के बाद दलहनों के आयात की नीति में किस तरह का परिवर्तन होता है यह देखना आवश्यक है। यदि आयात पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाये गए तो दलहनों का वैश्विक बाजार भाव और भी नीचे आ सकता है।
