पांच माह तक सुस्त रहने के बाद भारत में पाम तेल की मांग बढ़ने के संकेत

01-May-2025 05:16 PM

मुम्बई। चालू मार्केटिंग सीजन के शुरूआती पांच महीनों में यानी नवम्बर 2024 से मार्च 2025 के दौरान भारत में पाम तेल का आयात सामान्य औसत स्तर से काफी कम हुआ क्योंकि इसका भाव सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल के मुकाबले ऊंचा चल रहा था। लेकिन अप्रैल में पाम तेल का दाम नरम पड़ने से इसकी खरीद में भारतीय आयातकों की दिलचस्पी बढ़ गई।

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार मलेशिया में पाम तेल का उत्पादन एवं स्टॉक बढ़ने से कीमतों में नरमी का माहौल बन गया। इसके अलावा अमरीकी टैरिफ नीति का भी खाद्य तेल बाजार पर असर पड़ रहा है। 

उल्लेखनीय है कि मार्च 2025 तक पाम तेल के मुकाबले सोयाबीन तेल का भाव 70 से 100 डॉलर प्रति टन तक सस्ता (नीचे) था मगर अब पाम तेल का दाम ही सोयाबीन तेल से 50 डॉलर प्रति टन नीचे आ गया है।

इससे भारतीय रिफाइनर्स के लिए पाम तेल का आयात मार्जिन सुधरने लगा है और वे इसकी खरीद में सक्रियता दिखाने लगे हैं। दूसरी ओर पामोलीन, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल के आयात का 'पड़ता' (मार्जिन) ऋणात्मक बना हुआ है। 

फरवरी की तुलना में मार्च 2025 के दौरान भारत में पाम तेल का आयात 13.7 प्रतिशत बढ़कर 4.25 लाख टन पहुंचा मगर फिर भी मार्च 2024 के आयात से 38 प्रतिशत कम रहा। अप्रैल का आयात मार्च से बड़ा होने की संभावना है।

एक अग्रणी-व्यापार विश्लेषक के अनुसार चालू वर्ष के दौरान पाम तेल के वायदा अनुबंध में अब तक 12 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मलेशिया में क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का निर्यात ऑफर मूल्य अप्रैल डिलीवरी के लिए 23 अप्रैल को करीब 1000 डॉलर प्रति टन चल रहा था जो 24 अप्रैल को 5 डॉलर घटकर 995 डॉलर प्रति टन रह गया। 

कीमतों के आकर्षक होने पर पाम तेल का निर्यात प्रदर्शन आगामी महीनों में बेहतर रहने की उम्मीद है। एक विश्लेषक के मुताबिक सितम्बर 2025 तक पाम तेल का वैश्विक निर्यात बढ़कर 250 लाख टन पर पहुंच सकता है।

इसका आधार और चीन रहेगा। भारत दुनिया में पाम तेल का सबसे प्रमुख आयातक देश है। यहां इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे देशों से अत्यन्त विशाल मात्रा में पाम तेल का आयात किया जाता है।

2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान भारत में प्रति माह औसतन 7.50 लाख टन पाम तेल का आयात किया गया था जबकि इस बार आयात बहुत कम हुआ।

जनवरी फरवरी 2025 में तो 4-4 लाख टन से भी कम पाम तेल मंगाया गया जबकि मार्च में भी इसकी मात्रा 5 लाख टन से कम रही। इसके फलस्वरूप देश में पाम तेल का स्टॉक घट गया। अप्रैल के बाद अब मई-जून में भी पाम तेल के आयात में सुधार आने के आसार हैं।