पीडीएस में मिलेट्स की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर
29-Jan-2025 03:47 PM
सांगारेड्डी । इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (इक्रीसेट) तथा टाटा कॉर्नेल इंस्टीट्यूट (टीसीआई) द्वारा 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में मिलेट्स का संवर्धन' विषय पर आयोजित एक परिचर्चा में भाग लेने वाले विशेषज्ञों का कहना था
कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मिलेट्स को पीडीएस की वितरण श्रृंखला का एक आवश्यक एवं स्थायी अवयव बनाया जाना चाहिए
और इसकी मांग, खपत तथा आपूर्ति बढ़ाने का हर संभव प्रयास होना चाहिए। इससे न केवल पोषण सुरक्षा तथा मिलेट्स की पैदावार बढ़ेगी बल्कि चावल तथा गेहूं पर निर्भरता घटाने में भी सहायता मिलेगी।
हालांकि कुछ राज्यों में पीडीएस में वितरण के लिए मिलेट्स को पहले ही शामिल किया जा चुका है मगर इसकी खपत बढ़ाने का जोरदार प्रयास नहीं हो रहा है।
वितरण अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने की आवश्यकता है। इसमें नीति निर्माताओं के साथ-साथ विज्ञान का सहयोग भी जरुरी है।
मिलेट्स में अनेक पोषण तत्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं जो मानवीय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं। विभिन्न राज्यों में इसके उत्पादन संवर्धन को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
इसके लिए नई-नई एवं उन्नत किस्म के बीज का विकास होना चाहिए ताकि किसानों को कम लागत खर्च पर अधिक आमदनी प्राप्त हो और इसकी खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण बढ़ सके।
भारत में मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी तथा जौ सहित कुछ अन्य मोटे अनाजों और श्री अन्न का उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा है मगर इसके अधिकांश भाग का उपयोग औद्योगिक उद्देश्य में होता है जबकि प्रत्यक्ष खाद्य उद्देश्य में इसका इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है।
ऑर्गेनिक मिलेट्स का निर्यात बाजार भी बहुत बड़ा है और उत्पादन में वृद्धि के जरिए उसमें भारत अपनी भागीदारी बड़ा सकता है।
मिलेट्स का उत्पादन एवं उपयोग जितना बढ़ेगा, देश को उतना ही ज्यादा फायदा होगा। सरकार को इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित-प्रोत्साहित करना होगा।
