पंजाब में मक्का का क्षेत्रफल बढ़ाने में किसानों की दिलचस्पी कम
12-Aug-2025 08:31 PM
भटिंडा। हालांकि पंजाब सरकार ने फसल विविधिकरण को रफ्तार देने तथा जैव ईंधन के रूप में उपयोग बढ़ाने के उद्देश्य से मक्का की खेती को बढ़ावा देने हेतु एक पायलट परियोजना आरंभ की है मगर राज्य के किसान इसमें बहुत कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
राज्य सरकार ने सब्सिडी स्कीम के जरिए एक औद्योगिक फसल के तौर पर खरीफ सीजन में मक्का का बिजाई क्षेत्र एवं उत्पादन बढ़ाने का जो सकल प्रयास आरंभ किया है उसमें इसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है।
पंजाब सरकार ने राज्य के छह जिलों में कुल 12 हजार हेक्टेयर (30 हजार एकड़) क्षेत्र में मक्का की बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया था मगर इस लक्ष्य का 59 प्रतिशत भाग ही हासिल किया जा सका।
जिन छह जिलों में किसानों को धान के बदले मक्का की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया उसमें भटिंडा, संगरूर, पठानकोट, गुरदासपुर, जालंधर और कपूरथला शामिल है।
पायलट परियोजना में सब्सिडी स्कीम के तहत यह प्रावधान किया गया है कि जो किसान धान की खेती छोड़कर मक्का की बिजाई करेंगे उन्हें 17,500 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सरकार चाहती है कि पंजाब के किसान धान का रकबा घटाने का प्रयास करे ताकि पानी की खपत में कमी आ सके। मक्का की बिजाई के लिए अनुशंसित तिथि 15 जुलाई को ही समाप्त हो गई
और राज्य कृषि विभाग अब खेतों पर जाकर भौतिक सत्यापन का अभियान शुरू करने जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जिन किसानों ने धान के बजाए मक्का की खेती करने का दावा किया है उसे 7000 रुपए प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जा सके।
कृषि विभाग के आरंभिक आंकड़ों के अनुसार राज्य में इस बार 7000 हेक्टेयर या करीब 19,500 एकड़ क्षेत्र में मक्का की बिजाई हुई है। इसके तहत मक्का का रकबा पठानकोट में 4100 एकड़, संगरूर में 3700 एकड़, भटिंडा में 3200 एकड़, जालंधर में 3100 एकड़, कपूरथला में 2800 एकड़ एवं गुरदासपुर में 2600 एकड़ दर्ज किया गया।
