पीली मटर के आयात पर अंकुश लगाने का आग्रह

31-Jan-2025 04:02 PM

मुम्बई । चूंकि सस्ती पीली मटर का विशाल आयात होने तथा इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता काफी बढ़ जाने से अन्य दलहनों की मांग एवं कीमत प्रभावित होने लगी है और किसानों को अपने उत्पाद का आकर्षक तथा लाभप्रद मूल्य प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है इसलिए अब पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात को बंद किए जाने की मांग उठने लगी है।

सरकार ने पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा 28 फरवरी 2025 तक बढ़ा दी है जबकि उद्योग- व्यापार क्षेत्र के संघों-संगठनों का कहना है कि इस अवधि को उससे आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। 

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के चेयरमैन का कहना है कि सरकार को पीली मटर के आयात पर तत्काल रोक लगानी चाहिए क्योंकि पहले ही लगभग 30 लाख टन का विशाल आयात हो चुका है और अब इसके आयात की कोई जरूरत नहीं है।

पीली मटर के भारी-भरकम आयात से व्यापारियों तथा किसानों का हित प्रभावित होने लगा है क्योंकि अन्य दलहनों की मांग एवं कीमत पर इसका गहरा प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 

चेयरमैन के अनुसार सस्ती पीली मटर का भारी स्टॉक अभी देश में मौजूद है जिससे सिर्फ चना का कारोबार ही प्रभावित नहीं हो रहा है बल्कि अन्य दलहनों की मांग एवं खपत में भी कमी आ रही है क्योंकि पीली मटर के रूप में उपभोक्तओं को एक सस्ता विकल्प मिल रहा है।

वर्तमान समय में साबुत पीली मटर का भाव 32 रुपए प्रति किलो तथा इससे निर्मित दाल का दाम 40 रुपए प्रति किलो चल रहा है। दूसरी ओर अन्य प्रमुख दालों का मूल्य 100 रुपए प्रति किलो से ऊपर है। इस भारी मूल्यान्तर का असर तो बाजार पर पड़ना स्वाभाविक ही है। 

एनसीडीईएक्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार वर्तमान समय में पीली मटर का भाव मुम्बई में करीब 3300 रुपए प्रति क्विंटल, कानपुर में 3620 रुपए प्रति क्विंटल तथा गांधी धाम (गुजरात) में 3235 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है।

आई ग्रेन इंडिया के अनुसार वर्ष 2024 में देश के अंदर 29.68 लाख टन पीली मटर का विशाल आयात हुआ जिसके चलते दलहनों का कुल आयात भी उछलकर 66.33 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। इस बीच महाराष्ट्र तथा कर्नाटक जैसे राज्यों में चना की नई फसल की आवक शुरू हो गई है।