पाम ऑयल आउटलुक 2026: उत्पादन पर दबाव, कीमतों को नीतियों से सहारा

05-Jan-2026 09:10 AM

पाम ऑयल आउटलुक 2026: उत्पादन पर दबाव, कीमतों को नीतियों से सहारा
★ 2026 में वैश्विक पाम ऑयल बाजार एक नाजुक संतुलन के दौर से गुजरने वाला है। बढ़ती खाद्य और बायोफ्यूल मांग के बीच उत्पादन से जुड़ी चुनौतियां कीमतों को प्रभावित करेंगी। 2026 की पहली छमाही में पाम ऑयल की कीमतें मजबूत रह सकती हैं, जबकि दूसरी छमाही में आपूर्ति सुधरने पर बाजार कुछ हद तक स्थिर हो सकता है।
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इंडोनेशिया और मलेशिया का उत्पादन
★ इंडोनेशिया में 2026 में कच्चे पाम ऑयल (CPO) उत्पादन में 15–20 लाख टन की बढ़ोतरी की संभावना। 2025 में शुरुआती नौ महीनों के दौरान उत्पादन में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी, जिससे मजबूत फसल वर्ष की उम्मीद बनी।
★ सरकार द्वारा लाखों हेक्टेयर तेल पाम बागानों को अपने नियंत्रण में लेने से 2026 में 20–50 लाख टन उत्पादन जोखिम में पड़ सकता है। इससे आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
★ मलेशिया में 2025 में उत्पादन मजबूत रहने के बाद 2026 में हल्की गिरावट का अनुमान है। CPO उत्पादन घटकर लगभग 196 लाख टन रहने की संभावना है, जो पिछले वर्ष से करीब 4 लाख टन कम होगा। रकबे में ठहराव, पुराने पेड़ और विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता मलेशिया की उत्पादन क्षमता को सीमित कर रही है।
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बायोडीजल और सरकारी नीतियां
★ 2026 में पाम ऑयल की कीमतों को सबसे बड़ा सहारा सरकारी बायोडीजल नीतियों से मिलने की उम्मीद है। इंडोनेशिया ने 2026 के लिए B50 की बजाय B45 बायोडीजल मिश्रण लागू करने का फैसला किया है। इससे घरेलू स्तर पर पाम ऑयल की खपत बनी रहेगी और निर्यात बाजार में उपलब्ध आपूर्ति सीमित हो सकती है, जो कीमतों के लिए सकारात्मक संकेत है।
★ वैश्विक मांग के मोर्चे पर भारत 2026 में पाम ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार बना रहेगा और अंतरराष्ट्रीय कीमतों को सहारा देगा। चीन में सोयाबीन तेल की उपलब्धता अधिक रहने से पाम ऑयल की मांग सीमित रह सकती है। वहीं यूरोप में प्रस्तावित वन-विनाश नियम (EUDR) से व्यापार लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव की संभावना है।
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कैसे रहेंगे भाव
★ 2026 की पहली छमाही में पाम ऑयल की कीमतें मजबूत रहेंगी। दूसरी छमाही में इंडोनेशिया से आपूर्ति सुधरने पर भाव स्थिर हो सकते हैं, हालांकि मौसम, नीतिगत फैसले और वैश्विक व्यापार घटनाक्रम बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं।
★ कुल मिलाकर, 2026 में पाम ऑयल बाजार उत्पादन सुधार और नीतिगत जोखिमों के बीच संतुलन तलाशता नजर आएगा, जहां कीमतों की दिशा काफी हद तक सरकारी नीतियों और भारत जैसी प्रमुख आयातक अर्थव्यवस्थाओं की मांग पर निर्भर करेगी।

महत्वपूर्ण सूचना:
उपरोक्त रिपोर्ट केवल जानकारी के लिए है। आई-ग्रेन इंडिया किसी भी प्रकार के लाभ या हानि की जिम्मेदारी नहीं लेता और न ही बाजार में किसी विशेष दिशा (तेजी या मंदी) का समर्थन करता है। कृपया कोई भी निर्णय अपने विवेक और समझदारी से लें।