पाम तेल हुआ आकर्षक

26-Apr-2025 12:14 PM

पिछले पांच महीनों से भारत में पाम तेल के आयात की स्थिति कमजोर बनी हुई थी क्योंकि इंडोनेशिया, मलेशिया एवं थाईलैंड जैसे शीर्ष आपूर्तिकर्ता देशों में इसका निर्यात ऑफर मूल्य काफी ऊंचा चल रहा था और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसके मुकाबले सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी तेल का भाव आकर्षक बना हुआ था। भारत दुनिया में पाम तेल सहित खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश है।

यहां पाम तेल का सीमित आयात होने से प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों की चिंता और परेशानी बढ़ गई। इसके फलस्वरूप निर्यातको को ऑफर मूल्य घटाने के लिए विवश होना पड़ा।

अब पाम तेल का भाव प्रतिद्वंदी सोयाबीन तेल के सापेक्ष काफी हद तक प्रतिस्पर्धी या आकर्षक हो गया है जिससे भारतीय आयातकों की दिलचस्पी इसकी खरीद में बढ़ने लगी है।

वैसे भी जनवरी-मार्च 2025 की तिमाही के दौरान भारत में कम आयात होने से पाम तेल का स्टॉक काफी घट गया है। रिफाइनर्स को आयात बढ़ाने के लिए कीमतों में नरमी आने का इंतजार था और अब यह इंतजार खत्म हो रहा है।

पहले से ही इसकी संभावना बन रही थी कि मई-जून में भारत और चीन जैसे शीर्ष आयातक देश पाम तेल का आयात बढ़ाने का प्रयास करेंगे लेकिन इसके लिए पाम तेल की कीमतों का आकर्षक स्तर पर होना आवश्यक था।

आपूर्तिकर्ता देशों की समझ में ये बात देर से आई। जब वहां से निर्यात घटने लगा और हठ त्यागना पड़ा। हालांकि भारतीय आयातकों की अच्छी खरीद से निर्यातक देशों में पाम तेल बाजार को कुछ सहारा- समर्थन मिलने की उम्मीद है

लेकिन कीमतों में जोरदार बढ़ोत्तरी होना मुश्किल लगता है क्योंकि यदि कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया तो भारतीय रिफाइनर्स का झुकाव पुनः सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल की तरफ बढ़ सकता है। 

मलेशिया में चालू वर्ष के दौरान अब तक क्रूड पाम तेल के बेंचमार्क वायदा मूल्य में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है और इसलिए भारत के खरीदार इसकी खरीद में दोबारा अच्छी सक्रियता दिखाने लगे हैं।

भारत को शिपमेंट के लिए क्रूड पाम तेल का ऑफर मूल्य फिलहाल 1050 डॉलर प्रति टन के आसपास चल रहा है जिसमें परिवहन एवं बीमा खर्च आदि भी शामिल है।

यह मई डिलीवरी का मूल्य है। इसकी तुलना में क्रूड सोया तेल का आयात खर्च 1100 डॉलर प्रति टन के करीब बैठेगा। अप्रैल तक पाम तेल का आयात कमजोर रह सकता है लेकिन मई से इसमें सुधार आने की उम्मीद है।

भारतीय खरीदारों ने दिसम्बर 2024 से ही पाम तेल का आयात घटाना शुरू कर दिया था क्योंकि इसका दाम सोयाबीन तेल की तुलना में करीब 100 डॉलर प्रति टन ऊंचा हो गया था जो अब 50 डॉलर नीचे आ गया है।