प्राकृतिक आपदाओं से खरीफ फसलों को हुए नुकसान के कारण उत्पादन में गिरावट संभव
08-Oct-2025 12:28 PM
नई दिल्ली। देश के कुछ महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्यों में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान जरूरत से काफी ज्यादा बारिश होने तथा बाढ़ आने से खरीफ फसलों को बड़े पैमाने पर क्षति होने के संकेत मिल रहे हैं जिससे खासकर धान दलहन तिलहन, कपास एवं गन्ना की फसल का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
इसके फलस्वरूप केन्द्र सरकार को 2025-26 के खरीफ सीजन हेतु खाद्यान्न सहित अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन अनुमान में कटौती करनी पड़ सकती है।
हालांकि पिछले महीने कृषि आयुक्त ने उम्मीद जताई थी कि कुल उत्पादन गत वर्ष के लगभग बराबर ही होगा। लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र का मानना है कि वास्तविक उत्पादन सरकारी अनुमान से काफी कम हो सकता है। अनेक क्षेत्रों में चालू माह के दौरान भी जोरदार बारिश हुई है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 के खरीफ सीजन में खाद्यान्न का उत्पादन बढ़कर 17.10 करोड़ टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जो 2024-25 के खरीफ उत्पादन 16.80 करोड़ टन से 30 लाख टन ज्यादा है।
देश के पूर्वी एवं पश्चिमी राज्यों में अक्टूबर के प्रथम सप्ताह के दौरान अत्यन्त भारी वर्षा हुई और इससे एक बार फिर खेतों में पानी जमा हो गया।
बाढ़-वर्षा से सर्वाधिक नुकसान महाराष्ट्र में हुआ है जहां खरीफ फसलों के कुल बिजाई क्षेत्र का लगभग आधा भाग प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। पंजाब तथा राजस्थान में अगस्त-सितम्बर की बाढ़ से खरीफ फसलों को काफी क्षति हुई है।
विभिन्न प्रभावित राज्यों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर केन्द्रीय कृषि मंत्रालय खरीफ फसलों को हुए कुल नुकसान का आंकलन कर रहा है। लौटते मानसून से भारी बारिश होने के कारण उन क्षेत्रों में ज्यादा क्षति होने की आशंका है जहां फसलें परिपक्व होकर कटाई-तैयारी के चरण में पहुंच गई हैं।
बेमौसमी वर्षा से महाराष्ट्र एवं राजस्थान में दलहन-तिलहन फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है। गुजरात, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ इलाकों में भी फसलों को पहले ही हानि हो चुकी है।
प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान तो ज्वार, बाजरा एवं मक्का जैसे मोटे अनाजों की फसल को भी हुआ है मगर इसका दायरा अपेक्षाकृत छोटा है।
मानसून की लेट बारिश से खेतों में नमी का अंश ऊंचा होने के कारण कई क्षेत्रों में रबी फसलों की अगैती बिजाई में बाधा पड़ रही है। चना की खेती महाराष्ट्र में अभी तक जोर नहीं पकड़ पाई है। खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी की रफ्तार काफी धीमी है और इसलिए खेत जल्दी-जल्दी खाली नहीं हो रहे हैं।
