प्रमुख उत्पादक राज्यों में बाढ़-वर्षा से दलहन फसलों को नुकसान
01-Oct-2025 11:24 AM
नई दिल्ली। देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में भारी अधिशेष बारिश होने, खेतों में लम्बे समय तक पानी का जमाव रहने तथा स्थानीय स्तर पर बाढ़ का प्रकोप रहने से खासकर कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में मूंग एवं उड़द की फसल को काफी क्षति हुई है जबकि तुवर (अरहर) की फसल को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचने की सूचना मिल रही है।
इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। दलहनों की क्वालिटी प्रभावित होने से अच्छे एवं हल्के माल के दाम में अंतर बढ़ सकता है जबकि आमतौर पर इसका भाव कुछ ऊंचा रह सकता है।
हालांकि दलहन फसलों की बिजाई एवं प्रगति के शुरूआती दौर में मानसून की बारिश लाभदायक बनी हुई थी मगर बाद में अत्यन्त जोरदार बारिश से फसलों के लिए संकट उत्पन्न हो गया।
ध्यान देने की बात है कि भारत मूंग के उत्पादन में आत्मनिर्भर बना हुआ है और इसलिए सरकार ने वर्ष 2022 से ही इसके आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन उड़द एवं तुवर का उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत से कम होने के कारण विदेशों से विशाल मात्रा में इसके आयात की आवश्यकता पड़ती है।
सरकारी गोदामों में मूंग का तो पर्याप्त स्टॉक मौजूद है लेकिन उड़द का नगण्य स्टॉक बचा हुआ है। आईग्रेन इंडिया पहले से ही बार-बार सूचना दे रहा है कि उड़द की कीमतों में तेजी-मजबूती का माहौल बन सकता है। अब बाजार इसके लिए अनुकूल होने लगा है। अन्य दलहनों की कीमतों में उड़द के दाम में कम गिरावट आई है।
खरीफ कालीन उड़द के अन्य माल की आवक आरंभ हो गई है। प्रतिकूल मौसम से फसल को हुई क्षति के कारण फिलहाल मंडियों में हल्की क्वालिटी का माल ज्यादा आ रहा है। इसके फलस्वरूप अच्छी क्वालिटी की उड़द की मांग आगे काफी मजबूत रह सकती है।
म्यांमार एवं ब्राजील जैसे आपूर्तिकर्ता देशों के निर्यातक भी ऐसे अवसर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। निकट भविष्य में वहां उड़द का दाम बढ़ने के प्रबल आसार हैं। मूंग में भी अच्छी क्वालिटी के माल की आपूर्ति सीमित होने की संभावना है जिससे कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
तुवर के उत्पादक इलाकों में भी जोरदार बारिश हुई है मगर यह लम्बी अवधि की फसल है इसलिए फिलहाल इसको होने वाली क्षति का आंकलन करना जल्दबाजी होगी। पिछले दो दिनों से इसके दाम में तेजी की सुगबुगाहट देखी जा रही है जो आगे भी जारी रह सकती है।
