प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं की खरीद बढ़ाने पर सरकार की नजर
24-Apr-2025 01:46 PM
नई दिल्ली। प्राइवेट व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं फ्लोर मिलर्स- प्रोसेसर्स की बढ़ती सक्रिया तथा बड़े-बड़े उत्पादकों में स्टॉक रोकने की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की खरीद नियत लक्ष्य तक पहुंचने में संदेह उत्पन्न होने लगा है।
केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने चालू वर्ष के दौरान पंजाब में 124 लाख टन, हरियाणा में 75 लाख टन, मध्य प्रदेश में 60 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 30 लाख टन, राजस्थान में 20 लाख टन, बिहार में 2 लाख टन,
गुजरात में 1 लाख टन तथा अन्य राज्यों में 70 हजार टन के साथ राष्ट्रीय स्तर पर कुल 312.70 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है जबकि वर्ष 2024 में 266 लाख टन, 2023 में 262 लाख टन एवं 2022 में 188 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इतना तो निश्चित है कि पिछले साल की तुलना में इस बार गेहूं की सरकारी खरीद अधिक होगी। शुरूआती दौर में इसकी मात्रा 280-290 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है जबकि इसके आगे यह नियत लक्ष्य तक या उससे भी ऊपर पहुंच सकती है।
केन्द्रीय पूल में पहले से ही गेहूं का अच्छा स्टॉक मौजूद है इसलिए चालू वर्ष के दौरान इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का अभाव महसूस नहीं होगा।
शानदार उत्पादन की वजह से गेहूं की व्यापारिक खरीद अच्छी हो रही है इसलिए घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम रहने की उम्मीद है। कीमतों में भी अप्रत्याशित तेजी आना मुश्किल है।
सरकार की नजर प्रमुख उत्पादक राज्यों पर टिकी हुई है। मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में गेहूं की खरीद पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर क्रमश: 175 रुपए एवं 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है जबकि पंजाब- हरियाणा में सरकारी खरीद हमेशा बेहतर होती है।
केवल उत्तर प्रदेश का मामला फंसा हुआ है जहां किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचा दाम प्राप्त करना चाहते हैं। वहां व्यापारियों- मिलर्स की सक्रियता बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
