प्रमुख उत्पादक राज्यों में सोयाबीन फसल की हालत संतोषजनक

14-Aug-2025 07:49 PM

इंदौर। एक अग्रणी उद्योग संस्था- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने तीन शीर्ष उत्पादक राज्यों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान के 38 जिलों में 89 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण करने के बाद जो आंकड़ा जारी किया है

उससे पता चलता है कि राष्ट्रीय स्तर पर सोयाबीन का कुल उत्पादन क्षेत्र 115.21 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है जो सरकारी अकड़ा 119.51 लाख हेक्टेयर से 4.30 लाख हेक्टेयर कम है।

सोपा के अनुसार इस बार सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र मध्य प्रदेश में 48.64 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 48.20 लाख, राजस्थान में 9.07 लाख, कर्नाटक में 4.22 लाख, गुजरात में 2.73 लाख, तेलंगाना में 1.42 लाख, छत्तीसगढ़ में करीब 14 हजार तथा देश के अन्य राज्यों में 79 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा है। बिजाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। 

सोपा की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के जालना, बुलढाणा, बीड, लातूर, हिंगोली, नांदेड़ एवं परभणी जिलों में सोयाबीन की फसल अच्छी हालत में है और इसका सामान्य ढंग से विकास हो रहा है

लेकिन वाशिम, अकोला तथा अमरावती के कुछ इलाकों में पौधों की ऊंचाई अभी कम है क्योंकि वहां या तो बिजाई लेट से हुई या दोबारा बिजाई की आवश्यकता पड़ी। 

मध्य प्रदेश के मालवा संभाग में सोयाबीन की लगभग 70 प्रतिशत फसल में फूल लगने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और उसकी हालत सामान्य है।

वैसे गत वर्ष की तुलना में इस बार अशोक नगर, गुना, हरदा, बैतूल, खंडवा एवं खरगोन जिला में सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र में कुछ कमी आई है।

हरदा जिले में लगातार होने वाली बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने से करीब 20 प्रतिशत क्षेत्र में सोयाबीन की बिजाई संभव नहीं हो सकी जबकि अशोक नगर, गुना, सागर एवं विदिशा जिलों के निचले इलाके में भी फसल के साथ कुछ समस्या देखी जा रही है।

राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ एवं बारां जिले में फसल अच्छी हालत में है मगर झालावाड़ में रकबा 20 प्रतिशत घट गया है। कोटा में भी भारी वर्ष से फसल कमजोर है। राष्ट्रीय स्तर पर कुल मिलाकर सोयाबीन फसल की हालत संतोषजनक है।