प्रतिकूल मौसम एवं कीड़ों के प्रकोप से पंजाब के कपास उत्पादक परेशान
07-Dec-2024 05:20 PM
भटिंडा पिछले एक दशक के दौरान पंजाब में कपास के उत्पादन क्षेत्र में जबरदस्त गिरावट आई है जिसका प्रमुख कारण मौसम एवं जलवायु का अनिश्चित एवं अनियमित रहना,
कीड़ों-रोगों का प्रकोप बढ़ना तथा किसानों का अन्य लाभप्रद मूल्य वाली फसलों की तरफ आकर्षित होना माना जा रहा है। पंजाब में फसल की प्रगति के दौरान तापमान भी अत्यन्त ऊंचे स्तर पर पहुंच जाता है।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा एवं पोषण मिशन के अंतर्गत वित्त वर्ष 2014-15 से ही कपास विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसका उद्देश्य पंजाब सहित देश के 15 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में फसल की औसत उपज दर एवं कुल पैदावार में बढ़ोत्तरी करना है।
केन्द्र सरकार कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी नियमित रूप से बढ़ोत्तरी करके किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित कर रही है। इसके अलावा सही समय पर नहरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है और पिंक बॉलवर्म कीट का प्रकोप फैलने पर किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। कपास के बीज पर सब्सिडी भी दी जा रही है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा रोगों-कीटों के प्रबंधन-नियंत्रण हेतु सर्वोत्तम कृषि विधि की जानकारी एवं तैयारी के लिए किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है और खेतों पर जाकर उपायों के उपयोग का तरीका समझाया जाता है। फसल विविधिकरण योजना भी चलाई जा रही है।
भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कपास की खरीद की जा रही है। वैसे पंजाब में इसकी खरीद 2019-20 सीजन के 3.56 लाख गांठ से घटकर 2023-24 के सीजन में 38 हजार गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर सिमट गई।
पंजाब में पिछले चार साल से कपास के बिजाई क्षेत्र में लगातार गिरावट देखी जा रही है। 2024 के खरीफ सीजन में इसका क्षेत्रफल घटते हुए पहली बार एक लाख हेक्टेयर से नीचे आ गया। किसानों का आकर्षण लगातार घटता जा रहा है।
