पूर्वोत्तर राज्यों में जोरदार बारिश होने से बड़ी इलायची की फसल को फायदा
05-Jun-2025 05:18 PM
गुवाहाटी। पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक राज्यों- सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, आसाम एवं मेघालय तथा पश्चिम बंगाल के उप हिमालयी (दार्जिलिंग) क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून की जोरदार वर्षा होने से बड़ी (वाली) इलायची की फसल को आमतौर पर फायदा हो रहा है लेकिन कहीं-कहीं बाढ़ आने से इसे नुकसान होने की आशंका भी है। नीलामी केन्द्रों में माल की आवक कम तथा कीमत ऊंची होने की खबर मिल रही है।
नीलामी भाव ऊंचा होने का असर हाजिर बाजार मूल्य पर पड़ना स्वाभाविक ही है। 2024-25 के सीजन में प्रमुख उत्पादक इलाकों में मौसम की हालत अनुकूल नहीं रहने से बड़ी इलायची की फसल को काफी नुकसान हुआ था और इसके उत्पादन में गिरावट आ गई थी। नेपाल और भूटान में भी उत्पादन प्रभावित होने से कीमत तेज हो गई जिससे भारत में इसका आयात महंगा हो गया। वहां पुराना स्टॉक काफी कम बताया जा रहा है। भारत में मार्केटिंग सीजन अंतिम चरण में पहुंच गया है और अगस्त से नया सीजन आरंभ होने वाला है।
गत 29 मई को आयोजित नीलामी में बड़ी इलायची का भाव नीचे में 1250 रुपए से लेकर ऊपर में 1835 रुपए प्रति किलो के बीच दर्ज किया गया जो उत्पादकों के लिए काफी लाभदायक माना गया। हाजिर बाजार में माल का स्टॉक कम है मगर मांग भी ज्यादा मजबूत नहीं है जिससे कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव के साथ स्थिरता बनी हुई है। अगली फसल बेहतर उतरने के आसार हैं।
मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 के शुरुआती 11 महीनों में यानी अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के दौरान भारत से 1181.22 टन बड़ी इलायची का निर्यात हुआ जिससे 197.07 करोड़ रुपए की आमदनी हुई। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2023-24 की समान अवधि के दौरान 117.22 करोड़ रुपए मूल्य की 1055.09 टन बड़ी इलायची का निर्यात किया गया था। आगामी नई फसल पर सबका ध्यान केन्द्रित है।
